12 सितंबर,2025
उत्त्तरप्रदेश,मथुरा के प्रेरणापुरुष स्वर्गीय इन्दरसन गुप्ता और धर्मपरायणा स्वर्गीया प्रभावती देवी के सुपुत्र डॉ.विजय विजय खण्डेलवाल की कर्मस्थली ओड़िशा है जहां के व्यापारी नगरी कटक में (1980 में) उनका शुभागमन हुआ और देखते ही देखते वे अपने कारोबार(स्टील एण्ड पाइप्स तथा लौह अयस्क ट्रेडिंग की दुनिया के बेजोड़ बादशाह बन गये।कटक मारवाड़ी समाज जो ओड़िशा का सबसे बड़ा मारवाड़ियों का पंजीकृत संगठन हे उसके वे लगातार दो अवधि तक(2015 से…) अध्यक्ष के पद को पूरी सफलता के साथ वंदनीय तथा अनुकरणीय रुप से सुशोभित किये उसमें दो उनके स्व प्रकल्पःयुवा कौशल विकास तथा महिलासशक्तिकरण आज भी उनको यादगार बनाकर रखे हुए हैं। भारतीय संस्कार और संस्कृति के पूर्ण समर्थक डॉ. विजय खण्डेलवाल का जैसा हंसमुख चेहरा और वैसा ही उनका सौम्य व्यक्तित्व भी है और उसी के अनुरुप ही वे आचरण और व्यवहार भी करते हैं।सबसे बड़ी खुशी बात तो यह है कि उन्हीं की तरह उनकी पत्नी श्रीमती विमलेश खण्डेलवाल तथा उनकी तीनों लाड़ली बेटियों-श्रीमती कीर्ति,श्रीमती श्वेता तथा सुश्री तनीषा का है।वहीं हंसमुख और आध्यात्मिक भाव से परिपूर्ण चेहरा। गौरतलब है कि डॉ.विजय खण्डेलवाल के प्रति लोगों के आकर्षण और श्रद्धा का आधार उनकी प्रतिभा (शैक्षिक उच्च योग्यता),उनका शील और उनकी ऐश्वर्य क्षमता है। आज विकासशील भारत को विकसित भारत बनाने के लिए जिसप्रकार के सच्चे देशभक्त की जरुरत है,जिसप्रकार के स्वावलंबी व्यापारी की जरुरत है ,जिसप्रकार के सकारात्मक सोचवाले नागरिक की जरुरत है तथा जिस प्रकार के अपने राष्ट्र के राजनेताओं के सम्मान करनेवाले की जरुरत है वे सभी गुण डॉ. विजय खण्डेलवाल के पारदर्शी व्यक्तित्व में स्पष्ट रुप से दिखाई देते हैं। जिस आध्यात्मिक जगत से पिछले कुछ वर्षों से जुड़े हैं डॉ. विजय खण्डेलवाल उस जगत में वे अपने आपको मथुरा,वृंदावन और बरसाने के मन,वचन और कर्म से जोड़कर रखे हुए हैं। जब पूछता हूं कि वे कहां पर हैं तो वे मुस्कराते हुए बताते हैं कि वे अगले पन्द्रह दिनों तक नहीं मिल सकते हैं क्योंकि वे राधारानी के दर्शन के लिए बरसाने में हैं। सबसे बड़ी खुशी तो मुझे हाल ही में तब हुई जब पितृपक्ष आरंभ हुआ(गत सोमवार से) जब उन्होंने बताया कि वे पूरे सात दिनों तक भुवनेश्वर में मिल नहीं सकते हैं क्योंकि वे अपने घर में सिर्फ अपने परिवारजनों के लिए श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किए हैं। आज 12 सितंबर के दिन मेरी बस यही कामना है कि राधारानी की असीम अनुकम्पा से डॉ. विजय खण्डेलवाल आजीवन सपरिवार पारिवारिक,सामाजिक और आध्यात्मिक सुखों का उपभोग करते हुए सानंद जीवन व्यतीत करें जिससे उनके जीवन से सभी लोग तथा हमारा सनातनी समाज अनुप्रेरित हो सकें और मेरा व्यक्तिगत अनुचिंतन उनके प्रति सार्थक हो सकेः अध्यात्म की ओर डॉ.विजय खण्डेलवाल
विचारः अशोक पाण्डेय
अध्यात्म की ओर डॉ.विजय खण्डेलवाल हैप्पी बर्थडे(जन्मदिन मुबारक हो।)









