विचार: अशोक पाण्डेय का।
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भारतवर्ष की आत्मा ही अध्यात्म है।
“अयं निज: परो वेति गणना लघुचेतसाम्।
उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्कम्।।
-अर्थात् यह मेरा है और वह दूसरे का है। इस प्रकार की धारणा निम्न विचार वालों की होती है। जो उदार चरित्र के होते हैं उनके लिए पूरा विश्व ही अपना परिवार होता है। भारतवर्ष की सनातनी संस्कृति का मूल संदेश भी ‘वसुधैव कुटुम्कम्’ है। हमारा अध्यात्म हमें सत्य, अहिंसा, प्रेम, त्याग और सकारात्मक सोच आदि का पावन संदेश देता है। हमारा अध्यात्म यह भी कहता है कि कोई भी व्यक्ति अपनी जाति से महान् नहीं बनता है अपितु अपने कर्म से महान बनता है। रातों रात अर्थपति बनना और जीवनभर गलत आचरण करना; यह हमारा अध्यात्म कभी नहीं कहता है। इसलिए आप अपना आचरण उत्तम बनाएं और अपनी व्यक्तिगत सोच को उदार बनाएं !
-अशोक पाण्डेय








