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“आज मैंने क्या सोचा?”

-अशोक पाण्डेय
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जैसा कि आपको कल शाम में मैंने यह जानकारी दी कि अपने मन के कहने पर अपना फेसबुक और ट्विटर अकाउंट बंद कर दिया। मित्रों,मन बड़ा ही चंचल है। यह किसी भी विषय पर मात्र 43 सेकेण्ड ही रहता है। मन पर नियंत्रण आवश्यक होता है। आज के मोबाइल और सोसल मीडिया संस्कृति युग में अपना घर, परिवार, समाज और यहां तक कि अपना राष्ट्र और भारत-भारतीयता अच्छी नहीं लगती है। मन के कारण खाने की टेबल पर बैठे मात्र तीन सदस्य पति-पत्नी और एक संतान मोबाइल के ऊपर कुछ न कुछ देखते रहता है। जो खाने की टेबल पारिवारिक आत्मीयता को बढ़ावा देने में कभी अहम् भूमिका निभाती थी वह दूरियां बनाती नजर आ रही है। कक्षा में जो गुरु- शिष्य का तादात्म्य संबंध था वह मोबाइल और सोसल मीडिया के चलते समाप्त होते जा रहा है। मन मोबाइल और सोसल मीडिया संस्कृति की माया में‌ बांध कर रखता है। इसीलिए सोचा कि अपने जीवन के 73वें साल में स्व शांति के लिए फेसबुक और ट्विटर से अलग होकर रहूं। आप जानते हैं कि मन की शांति के लिए ही चौथेपन में लोग वैचारिक रूप से संन्यास धारण करते हैं। गोस्वामी तुलसीदास जी ने तो अपने व्यक्तिगत जीवन के 78वें साल में श्रीरामचरितमानस की रचना की। मान्यवर,हो सके तो आप भी फेसबुक और ट्विटर का इस्तेमाल बहुत कम करें जिससे आपके मन को भी थोड़ी शांति मिले।
जय जगन्नाथ!
-अशोक पाण्डेय

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