आप अपने सदाचारी जीवन यापन से,अपनी सत्यनिष्ठा से और अपने कर्तव्य परायणता से एक “बुद्ध पुरुष” बनने की कोशिश करें!
जैसे राजा जनक ने किया , जैसे राजा दशरथ ने किया, जैसे मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने किया।
जीवन में सत्संग और सत्कर्म अवश्य करें!
जय जय जगन्नाथ!










