

“ केन्द्रीय विद्यालय संगठन फ्रेटरनिटी के
रीयल हीरो हैं- लाइब्रेरियन श्री जितेन्द्र दास “
प्रस्तुतिः अशोक पाण्डेय,राष्ट्रपति पुरस्कारप्राप्त
स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में एशिया का एकमात्र गतिनिर्धारक शैक्षिक संगठन केन्द्रीय विद्यालय संगठन,नई दिल्ली है जिसका प्रत्येक केन्द्रीय विद्यालय अपने आपमें “एक लघु भारत” है। संगठन का प्रत्येक शिक्षक-शिक्षिका गुरु-शिष्य शाश्वत परम्परा के आदर्श हैं। संगठन के प्रत्येक विद्यालय का शैक्षिक परिवेश उत्कृष्ट है। गुरुकुल की गुरु-शिष्य तादात्म्य संबंध का यथार्थ आदर्श है। बच्चों को उपलब्ध घर का आत्मीय माहौल स्कूली शिक्षा के लिए प्रेरणास्त्रोत है। भारतीय अनेकता में एकता का सफल संदेश है। उसी केवीएस फ्रेटरनिटी के एक लाइब्रेरियन श्री जितेन्द्र दास हैं जो रीयल हीरो हैं। 28अक्तूबर को ओडिशा की पौराणिक,सांस्कृतिक और महाप्रभु लिंगराज की नगरी भुवनेश्वर के एक कुलीन परिवार में जन्मे श्री जितेन्द्र दास एक सुयोग्य माता-पिता की एक सुयोग्य संतान हैं। उनके जन्मदिन पर आज दिनांकः28अक्तूबर,2021 को आलोकपुरुष.इन न्यूज चैनल के सम्पादक अशोक पाण्डेय की ओर से उनको बहुत-बहुत बधाई तथा अनेकानेक शुभकामनाएं। उनके साथ रहकर,उनकी आंतरिकता तथा आत्मीयता का अनुभवकर मैं यह गर्व से कह सकता हूं कि श्री जितेन्द्र दास सकारात्मक सोचवाले एक सफल लाइब्रेरियन हैं। सर्वगुण संपन्न केवीएस के वे रीयल हीरो हैं। सत्यहरिश्चन्द नाटक में भारतेन्दु हरिश्चंद कहते हैं कि-“बडा पद मिलने से कोई बडा नहीं होता है ,बडा वही है जिसका चित्त बडा है।“ मेरे अपने अनुभव भी यही कहते हैं कि जीतू का हृदय बडा है। विशाल है। उदार है। संवेदनशील है। श्री जितेन्द्र दास की जिम्मेदारी सच्ची जिम्मेदारी का अहसास दिलाती है जो केन्द्रीय विद्यालय संगठन फ्रेटरनिटी के लिए अनुकरणीय है। जाडा,गर्मी,बरसात,सभी वक्त वे समय पर विद्यालय आते हैं। स्कूल के पुस्तकालय कक्ष को पूरी तरह से साफ-सुथरा तथा पुस्तकों आदि को सुव्यवस्थित कर प्रार्थनासभा में सबसे पहले पहुंचते हैं। उनके चेहरे की सहज मुसकराहट उनकी सभी के प्रति आत्मीयता को स्पष्ट करती है।विद्यालय में समय-समय पर सफल बुकफेयर लगाना अगर कोई सीखे तो जितेन्द्र दास से सीखे।उनका पारदर्शी व्यक्तित्व उनके समयनियोजन को स्पष्ट करता है। उनका विशेष शौक परोपकारी,सहयोगी,त्यागी,तपस्वी तथा कर्तव्यपरायणता उनको एक सफल लाइब्रेरियन बना दिया है। शैक्षिक योग्यता की बात करें तो वे एम.ए.,एम.लाइब्रेरी साइंस हैं। सम्प्रति वे केन्द्रीय विद्यालय नं.3,मंचेश्वर,भुवनेश्वर में लाइब्रेरियन पद पर कार्यरत हैं। उनको मिले अनेक पुरस्कार-सम्मान और उनके अच्छे कार्यों का प्रशस्तिपत्र श्री जितेन्द्र दास की दूरदर्शिता और कार्यसंस्कृति को,उनके उत्साह,आत्मविश्वास तथा मनोबल को सातवे आसमान पर पहुंचा दिया है।स्कूल के प्रबंधन तथा एकाउण्ट्स आदि का ज्ञान उनको और अधिक लोकप्रिय बना दिया है। आज भी उनको देखने से ऐसा कभी नहीं लगता कि उनके ऊपर ढलती उम्र का कोई भी प्रभाव उन पर है। उनकी पत्नी भी केवीएस में पीजीटी रसायनविज्ञान शिक्षिका हैं। श्री जितेन्द्र दास की दोनों लाडली पुत्रियां उनके प्राण हैं। श्री जितेन्द्र दास का यह मानना है कि कोई भी काम बडा-छोटा नहीं होता है,उस काम के पीछे निहित अच्छी भावना होती है। वैश्विक महामारी कोरोनाकाल में जिसप्रकार की जिम्मेदारी श्री जितेन्द्र दास ने निभाई है ,वह सचमुच उल्लेखनीय,प्रशंसनीय तथा अनुकरणीय जिम्मेदारी रही है। इसीलिए तो मेरी समझ से “केन्द्रीय विद्यालय संगठन फ्रेटरनिटी के श्री जितेन्द्र दास रीयल हीरो हैं। महाप्रभु जगन्नाथ उनको शतायु बनायें.तेजस्वी और निःस्वार्थभाव से जनहितकारी बनायें।महाप्रभु लिंगराज उनको आजीवन निःस्वार्थी जनसेवक और जननायक बनायें।
-अशोक पाण्डेय










