ऐतरिय उपनिषद कहता है कि व्यक्ति का अपना शरीर ही स्वयं में मंदिर है। आपकी वाणी में अग्नि देव का वास है,आपकी नाक में प्राण बनकर वायु देव और आपकी बुद्धि और मन में सप्त ऋषिगण मौजूद हैं।
आप मन-मंदिर को सुंदर बनाइए।
आपका आजका दिन प्रेरणादायक सिद्ध हो।ऐसी मंगल कामना के साथ
-अशोक पाण्डेय










