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ओडिशा के प्रथम मारवाडी स्वतंत्रता सेनानीः स्वर्गीय प्रह्लाद राय लाठ जिन्हें ओडिशा के वीर पुत्र की उपाधि प्राप्त थी

-अशोक पाण्डेय
भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में ओडिशा के स्वतंत्रता सेनानियों का भी योगदान सराहनीय रहा है। ओडिशा के प्रमुख स्वतंत्रा सेनानियों में उत्कलमणि पण्डित गोपबंधु दास,उत्कल गौरव मधुसूदन दास, डॉ.राधा नाथ रथ, रमादेवी, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, पण्डित गोवर्द्धन मिश्र,नवकिशोर चौधरी, डॉ.हरेकृष्ण महताब,फकीर मोहन सेनापति,विश्वनाथ दास,वीर सुरेन्द्र साई,बीजू पटनायक तथा ओडिशा मारवाडी समाज के एकमात्र स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय प्रह्लाद राय लाठ आदि के नाम अमर हैं।इन सभी को उनकी सच्ची देशभक्ति,उनके त्याग,समर्पण तथा निःस्वार्थ भाव के लिए ओडिशा के वीरपुत्रों से इन्हें अलंकृत किया गया।ओडिशा के वीरपुत्रों से सम्मानित किये जानेवाले जितने भी अमर स्वतंत्रता सेनानी थे उनमें ओडिशा मारवाडी समाज से एकमात्र प्रह्लाद राय लाठ का नाम आज भी स्वर्णिम अक्षरों में अंकित है जिन्होंने अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया था भारत के स्वतंत्रा आंदोलन में।स्व.प्रहलाद राय लाठ गांधीजी के नेतृत्व में भारत की आजादी में सहयोग दिये थे, जेल गये थे।वे मात्र 13 साल की उम्र में वे स्वतंत्रता संग्राम में कूदे थे। वे गांधीजी के भारत छोडो आन्दोलन में हिस्सा लिये थे। वे बालसेवा समिति,हरिजन सेवा संघ तथा चरखा संघ से आजीवन जुडे रहे। संबलपुर में 1944 में स्वतंत्रता सेनानी प्रभावती देवी के बाल निकेतन अनाथ आश्रम के निर्माण में उन दिनों प्रह्लाद राय लाठ द्वारा स्वेच्छापूर्वक दिया गया एक लाख रुपये का सहयोग एक असाधारण सहयोग था। स्व.प्रह्लाद राय लाठ का जन्म ओडिशा के संबलपुर के संखरीपारा गांव में 07फरवरी,1907 को एक कुलीन तथा धनाढ्य व्यावसायी परिवार में हुआ था। उन्हें बाल्यकाल से ही रामायण,महाभारत,गीता तथा श्रीमद्भागवत आदि धार्मिक पुस्तकें पढने का शौक था।वे सत्संगति में पल-बढकर ईश्वरभक्त बालक बने जिनमें देशभक्ति की भावना अपने बाल्यकाल से ही कूट-कूटकर भरी थी।इसीलिए वे अपने बाल्यकाल में अपने घरवालों से छिपकर ओडिशा के स्वतंत्रासेनानी लक्ष्मीनारायण मिश्र,भागीरथी पटनायक तथा चन्द्रशेखर बेहरा आदि के साथ मिलकर भारत की स्वतंत्रता आंदोलन से जुडे अनेकानेक मीटिंगों तथा सभाओं में हिस्सा लेते थे।वे मात्र 13 वर्ष की आयु में पूरे आत्मविश्वास के साथ भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पडे।वे आजादी की लडाई के लिए अपने स्कूल को छोड दिया।वे वानर सेना में शामिल हो गये।वे बालसेवा समिति जैसी अनेक जनहितकारी समितियों का कुशल नेतृत्व किये। उनकी पत्नी स्वर्गींया रुक्मिणी देवी लाठ भी आजादी की लडाई में ओडिशा से महिलाओं को संगठित करने के लिए नारी सेवा समिति का गठन कर अपनी अहम् भूमिका निभाई। 1930 में प्रह्लाद राय लाठ संबलपुर कॉंग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बने और लगातार 18 वर्षों तक उस पद को सफलतापूर्वक संभाले। वे 1937 में पद्मपुर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से ओडिशा विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए।1934 में जब गांधीजी दूसरी बार संबलपुर आये तो उनके आह्वान पर प्रह्लाद राय लाठ एक सच्चे देशभक्त का मिसाल देते हुए भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पडे।उनकी पत्नी रुक्मिणी देवी लाठ ने एक सच्चे देशभक्त की सच्ची देशभक्त पत्नी के रुप में लगभग 300 तोले का अपना गहना हरिजन कल्याण के लिए स्वेच्छापूर्वक दान कर दिया। गांधीजी के पूनः आह्वान पर प्रह्लाद राय लाठ ने 1937 में विधानसभा से त्यागपत्र दे दिया तथा भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में मन,तन और धन से जुड गये।उनके मित्र भैरव महंती ने उनका वखूबी साथ दिया। चार दिसंबर,1940 को प्रह्लाद राय लाठ को अंग्रेजों ने गिरफ्तार कर लिया और उनको ब्रह्मपुर जेल भेज दिया गया। वे हरिजन सेवासंघ और चरखा संघ से भी सक्रिय रुप से जुडे रहे। 1942 में वे गांधीजी के भारत छोडो आंदोलन में खुलकर सामने आये।यही नहीं,स्वर्गींय प्रह्लाद राय लाठ ने 1944 में पुणे आगाखां पैलेस,कस्तूरबा मेमोरियल के लिए उन दिनों कुल 75 हजार रुपये का अनुदान अपनी ओर से दिया।1944 में वे संबलपुर में स्वतंत्रता सेनानी प्रभावती देवी के बाल निकेतन नामक अनाथाश्रम के लिए कुल एक लाख रुपये का अनुदान दिये। वे हरिजन सेवक संघ से भी जुडे रहे।सबसे बडी बात स्व.प्रह्लाद राय लाठ की यह थी कि वे अपनी कुल आय का 50 फीसदी हिस्सा लोगों की भलाई,धार्मिक कार्य आदि पर खर्च करते थे। संबलपुर गंगाधर मेहर कॉलेज के निर्माण पर वे कुल 12लाख रुपये खर्च किये थे जिसके लिए वे आज भी संबलपुर में दानकर्ता कर्ण के रुप में अमर हैं। ऐसे निःस्वार्थी समाजसेवी तथा सच्चे देशभक्त प्रह्लाद राय लाठ का निधन 17मई,2001 को हो गया। ओडिशा की सांस्कृतिक तथा व्यापारी नगरी कटक के उत्कल साहित्य समाज के ओडिशा के वीरपुत्रों में आज भी उनकी तस्वीर है तथा आज जब आजाद भारतवर्ष अपनी आजादी का अमृत महोत्सव वर्ष मना रहा है इस वक्त भी ओडिशा के प्रथम मारवाडी स्वतंत्रता सेनानी के रुप में स्वर्गीय प्रह्लाद राय लाठ ओडिशा के समस्त मारवाडी समाज को सच्ची देशभक्ति का अमर संदेश दे रहे हैं।उनका निवासस्थल भुवनेश्वर,253-ए,फारेस्टपार्क आज भी उनकी मधुर स्मृतियों का आईंना है।गौरतलब है कि भुवनेश्वर मारवाडी सोसायटी के वर्तमान अध्यक्ष संजय लाठ के दादाजी थे ओडिशा के प्रथम मारवाडी स्वतंत्रता सेनानी प्रह्लाद राय लाठ।
अशोक पाण्डेय

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