-अशोक पाण्डेय
ओडिशा जिसे वैदिक काल से तथा कालांतर में उड्र,उत्कल और कलिंग के नाम से जाना गया उस ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक हैं। यहां उल्लेखनीय यह है कि जब किसी भी प्रदेश का मुख्यमंत्री तटस्थत राजनीति करता है,शांतिपूर्ण सह अस्तित्व की नीति को अपनाकर अपनी जिम्मेदारी जिम्मेदारी समझकर ईमानदारी के साथ और वह भी निःस्वार्थभाव से निभाता है तो वह मुख्यमंत्री प्रियदर्शी मुख्यमंत्री होता है। वह मुख्यमंत्री एक अजातशत्रु मुख्यमंत्री हो जाता है। वह अपने प्रदेश की जनता के सभी प्रकार के हितों की रक्षा निःस्वार्थभाव से करता है।वह मुख्यमंत्री सबका साथी,सबका दोस्त हो जाता है।वह जन-जन का सबसे प्रिय राजनेता हो जाता है।ओडिशा के वर्तमान मुख्यमंत्री नवीन पटनायक एक राजनेता कम अपितु ओडिशा की समस्त जनता के सच्चे हमसफर अधिक हैं। ओडिशा के प्रथम मुख्यमंत्री हरेकृष्ण महताब थे। उन्होंने 23 अप्रैल 1946 में राज्य के पहले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी जबकि 2000 से लगातार ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ही हैं।यहां उल्लेखनीय यह भी है कि ओडिशा के मुख्यमंत्री के रुप में नवकृष्ण चौधरी, बीजू पटनायक,बीरेन मित्रा,सदाशिव त्रिपाठी,राजेन्द्र नारायण सिंहदेव,विश्वनाथ दास,नंदिनी शतपथी, बिनायक आचार्य,नीलमणि राउतराय,जानकी बल्लव पटनायक, हेमानंद बिस्वाल,बीजू पटनायक,गिरिधर गबांग आदि थे जिनके राजनीति योगदानों के अवलोकन से तथा उनके व्यक्तिगत विश्लेषण से पता तलता है कि वर्तमान मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की राजनीति छवि समुज्ज्वल है। वे बीजू जनता दल के सुप्रिमो हैं।ब्रिटिशराज के दौरान ओडिशा बंगाल प्रेसीडेंसी का हिस्सा था । पहली अप्रैल,1936 में ओडिशा प्रदेश अस्तित्व में आया जिसे 26 जनवरी 1950 को भारत के एक स्वतंत्र प्रदेश के रूप में स्वीकार कर लिया गया।यहां उल्लेखनीय यह है कि 1593 में ओडिशा पर मुगलों का शासन था।1751 में मराठों का।अशोक ने 261 ई पूर्व कलिंग युद्ध किया। यहां पर बौद्ध धर्म भी था तथा जैन धर्म भी। 1817 में अंग्रेजों ने ओडिशा के प्रथम स्वतंत्रता आंदोलन पाइक विद्रोह को दबाया।1870 में मधुसूदन दास स्नातक की डिग्री पाने वाले प्रथम ओडिया थे।1936 में ओडिशा के कुल 6 जिले कटक,पुरी,बालेश्वर,गंजाम,कोरापुट और संबलपुर पहले अस्तित्व में आये।आज ओडिशा में कुल 30 जिले हैं। 1948 में ओडिशा की राजधानी कटक से भुवनेश्वर स्थानांतरित हुई।1948 में हीराकुण्ड बांध का निर्माण हुआ।1953 में राउरकेला स्टील प्लांट।ओडिशा विधानसभा भवन का उद्घाटन 1961 में हुआ।20फरवरी,2014 को ओडिया भाषा को भारत की शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिला।मुखमयमंत्री नवीन पटनायक को मिली इन तमाम विरासतों को आगे बढाने तथा ओडिशा को एक विकसित प्रदेश मनाने का मौका मिला। ओडिशा की कुल आबादी लगभग 4.5 करोड है जिनमें कुल लगभग 93.63 लोग हिन्दू धर्म को मानते हैं। जगन्नाथ संस्कृति ही वास्तव में ओडिया संस्कृति है। इसीलिए भगवान जगनाथ ओडिशा के प्रत्येक हिन्दू के इष्टदेव,गृहदेव,ग्राम्यदेव तथा राज्यदेव हैं।ओडिशा की आतिथ्य परम्परा को भगवान जगन्नाथ के चलते अतिथिदेवोभव की परम्परा मानी जाती है।भारत के अन्य प्रदेशों की तरह ओडिशा की राजनीति बिलकुल ही नहीं है।यहां की राजनीति में राजनीतिक खेल तो बिलकुल ही नहीं है।इसीलिए तो ओडिशा के वर्तमान मुख्यमंत्री नवीन पटनायक 2000 से ही ओडिशा के सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री हैं।वे राजनीतिक राजनेता कम अपितु संवेदनशील व्यक्ति अधिक हैं। वे ओडिशा की जगन्नाथ संस्कृति के सच्चे रक्षक और प्रचारक हैं। इसलिए वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमणकाल से ही वे मानव सेवा को माधव(जगन्नाथ)सेवा मानकर ओडिशा के सभी कोरोना संक्रमित लोगों को भाजन से लेकर उनकी चिकित्सा आदि की समस्त सुविधाएं आदि अपनी सरकार की ओर से पूरी आत्मीयता के साथ निःशुल्क उपलब्ध कराई। पुरी जगन्नाथ मंदिर की प्रदक्षीणा स्थल को अत्याधुनिक बनाने से लेकर भुवनेश्वर महाप्रभु लिंगराज मंदिर तक तथा ओडिशा के सभी नामी देवालयों तथा शक्तिपीठों का जीर्णोद्धार कराया।महिला सशक्तिकरण से लेकर आदिवासी कल्याण से संबंधित सभी सेवा प्रकल्पों को पूरी ईमानदारी के साथ लागू कराया। ओडिशा में हॉकी खेल से लेकर सभी प्रकार के खेलों के विकास के लिए अत्याधुनिक स्टेडियम से लेकर सभी खेल संसाधन उपलब्ध कराया।ओडिया भाषा विश्वविद्यालय की स्थापना से लेकर अनेक मेडिकल,इंजीनियरिंग,विभिन्न कौशल विकास,बाल मेधा विकास आदि जैसी अनेक योजनाओं को उन्होंने लागू कराया है। वे ओडिशा की आमजनता के सभी प्रकार के हितों की रक्षा करते हैं।ओडिया भाषा,ओडिया संस्कार(जगन्नाथ संस्कृति संस्कार),ओडिया साहित्य,ओडिया कला और संस्कृति का सतत विकास कर रहे हैं।आज ओडिशा में जितने भी अप्रवासी लोग हैं वे सभी मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को अपना रोलमॉडल मानते हैं और ओडिशा को ही अपनी वास्तविक कर्मस्थली मानकर ओडिशा का विकास करते हैं।यह सबकुछ मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के पारदर्शी तथा आत्मीय व्यक्तित्व का ही नतीजा है।मुख्यमंत्री ने ओडिशा में औद्योगिक तथा शैक्षिक क्रांति ला दी है जिसके बदौलत वे एक ओडिशा की जनता के सच्चे लोकनायक बन चुके हैं।
-अशोक पाण्डेय










