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कार्तिक का तारा भोज

-अशोक पाण्डेय
जैसाकि सभी सनातनी जानते और मानते हैं कि कार्तिक माह सबसे पवित्रतम माह है जिसमें तारा भोज का अपना एक विशिष्ट महत्त्व है। कार्तिक मास आरंभ होते ही आकाश के ताराओं को नित्य रात्रि में उन्हें अर्क देकर भोजन करने पर जीवन हरप्रकार से सुखी हो जाता है। जीवन के सारे पाप दूर हो जाते हैं। यह व्रत पूरे एक महीने का होता है जिसके संपन्न होने पर ब्राह्मणों को आदर सहित भोजन कराकर यथाशक्ति दान देना चाहिए। तारा भोज कराने से कार्तिक माह में चारों तरफ ज्योतिर्मय परिवेश रहता है। 21अक्तूबर,गुरुवार से कार्तिक मास की शुरुआत हो रही है। भगवान विष्णु के लिए यह माह पूरी तरह से समर्पित होता है जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण श्री जगन्नाथ पुरी धाम का श्रीमंदिर में जगन्नाथजी की नित्य पूजा है। यह माह हरप्रकार से धन,सुख,समृद्धि और शांति देनेवाला होता है। भगवान विष्णु इसी माह में ही योग निद्रा से जगते हैं। तारा भोजन कराने से चारों तरफ सात्विकता का साम्राज्य कायम हो जाता है। वैसे तो तारा भोज की यह परम्परा समाप्त हो चुकी है जिसे आज बचाने की नितान्त आवश्यकता है।
अशोक पाण्डेय

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