युवाओं को एक स्थायी भविष्य के लिए
लचीलेपन को नए सिरे से
परिभाषित करना होगा:
ओडिशा के राज्यपाल, डॉ. हरिबाबू कंभमपति
भुवनेश्वर, 24 अगस्त: कीट इंटरनेशनल स्कूल,भुवनेश्वर में आयोजित दो दिवसीय मॉडल यूनाइटेड नेशंस (MUN) का 12वां संस्करण ,कार्यक्रम गत रविवार को ओडिशा के मान्यवर राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपति के एक ओजस्वी तथा भावपूर्ण संबोधन के साथ संपन्न हो गया। बतौर मुख्य अतिथि पधारे राज्यपाल ने संवाद, विविधता और वैश्विक नागरिकता की भावना को मूर्त रूप देने के लिए युवा प्रतिनिधियों की सराहना की। 12वें मुन में भारतभर से लगभग 1000 से अधिक छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया जिनमें कीट इंटरनेशनल स्कूल के कुल 100 छात्र भी शामिल थे। आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम में कुल मिलाकर, 13 समितियों का गठन किया गया, जिन्होंने शांति, सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा-परिचर्चा हुई। समापन समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए ओड़िशा के मान्यवर राज्यपाल डॉ. कंभमपति ने इस बात पर ज़ोर दिया कि आज की दुनिया में लचीलापन केवल संकट को सहने के बारे में नहीं है, बल्कि सामूहिक रूप से अनुकूलन और नवाचार करने के बारे में है। उन्होंने कहा, “हम एक परस्पर जुड़े हुए युग में जी रहे हैं। जलवायु परिवर्तन, गरीबी, महामारियाँ, लैंगिक समानता, डिजिटल परिवर्तन और क्षेत्रीय संघर्ष ऐसी चुनौतियाँ हैं जो सीमाओं से परे हैं। फिर भी, यह नवाचार, सतत विकास और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए अपार अवसरों का युग भी है।” राज्यपाल ने छात्रों से नेतृत्व को शक्ति के बजाय सेवा और सहयोग की ज़िम्मेदारी के रूप में अपनाने का आग्रह भी किया। उन्होंने कहा, “कूटनीति का मतलब बहस जीतना नहीं, बल्कि साझा आधार खोजना है। किसी राष्ट्र की असली ताकत प्रभुत्व में नहीं, बल्कि सहयोग में निहित है।” राज्यपाल ने अपनी व्यक्तिगत भावना भी साझा की और कहा कि उनका आजीवन सपना संयुक्त राष्ट्र में भारत का प्रतिनिधित्व करना था। उन्होंने उपस्थित लोगों से कहा, “हालांकि वह सपना पूरा नहीं हुआ, फिर भी मुझे इस आदर्श संयुक्त राष्ट्र में भाग लेकर खुशी हो रही है।” उन्होंने छात्रों के लिए ऐसे मंचों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, “आप यहाँ एक ज्ञान लेकर आ सकते हैं, लेकिन हज़ारों ज्ञान लेकर लौटते हैं। यही मुन जैसी प्रतियोगिताओं का प्रभाव है।” राज्यपाल ने अपनी व्यक्तिगत भावना भी साझा की और कहा कि उनका आजीवन सपना संयुक्त राष्ट्र में भारत का प्रतिनिधित्व करना था। उन्होंने उपस्थित लोगों से कहा, “भले ही वह सपना पूरा नहीं हुआ, फिर भी मुझे इस आदर्श संयुक्त राष्ट्र में भाग लेकर खुशी हो रही है।” अवसर पर सम्मानित अतिथि के रुप में पधारे कीट-कीस-कीम्स के संस्थापक डॉ. अच्युत सामंत ने राज्यपाल की विनम्रता और मानवीय दृष्टिकोण की उन्मुक्त कण्ठ से प्रशंसा की और यह याद कराते हुए कि कैसे डॉ. कंभमपति ने ओडिशा के पहले राज्यपाल के रूप में एक कीर्तिमान इतिहास रचा, जिसमें उन्होंने विश्व के सबसे बड़े आदिवासी आवासीय विद्यालय कीस के कुल 40,000 आदिवासी छात्र-छात्राओं के साथ ज़मीन पर बैठकर कठोपनिष्द के मंत्र को साकार करते हुए भोजन किया, डॉ. सामंत ने मान्यवर राज्यपाल जी को “एक ऐसी नदी” बताया जो कभी चिल्लाती या शेखी नहीं बघारती है बल्कि ईमानदारी से कल-कल निनाद करती हुई अनवरत बहती रहती है और अपनी अच्छाई से लोगों का पोषण करती है। गौरतलब है कि आयोजित दो दिवसीय मुन कार्यक्रम, जो 23 अगस्त को कीट-कीस की अध्यक्षा श्रीमती शाश्वती बल, स्कूल की चेयरपर्सन डॉ. मोनालिसा बल, प्रिंसिपल डॉ. संजय सुआर और अंतर्राष्ट्रीय पाठ्यक्रम के प्रमुख श्री मार्क एल. कोलमैन सहित अनेक गणमान्य लोग सादर आमंत्रित थे ने युवाओं के करतब की सराहना की।कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे भारत के लगभग एक हजार छात्र-छात्राओं ने साइबर युद्ध, परमाणु अप्रसार, पर्यावरण-नवाचार, शरणार्थी संकट और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के मानसिक स्वास्थ्य निहितार्थ जैसे वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।
अशोक पाण्डेय