भुवनेश्वर, 21 जनवरी:
कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज़ (कीस) में बुधवार को 66वें अखिल भारतीय प्रौढ़ शिक्षा सम्मेलन का शानदार शुभारंभ हुआ। इस सम्मेलन में देशभर से शिक्षा विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं और प्रौढ़ शिक्षा से जुड़े कार्यकर्ताओं ने भाग लिया और समावेशी राष्ट्रीय विकास में प्रौढ़ शिक्षा की भूमिका पर विचार-विमर्श किया। इस सम्मेलन का संयुक्त आयोजन इंडियन एडल्ट एजुकेशन एसोसिएशन (IAEA) और कीस द्वारा किया जा रहा है। इस अवसर पर इंडियन एडल्ट एजुकेशन एसोसिएशन ने प्रौढ़ शिक्षा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए कीट-कीस और कीम्स के संस्थापक डॉ. अच्युत सामंत को विशेष सम्मान से सम्मानित किया। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ. सामंत ने कहा कि वे पिछले तीन दशकों से शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं और उनका मुख्य उद्देश्य शिक्षा के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन लाना है। उन्होंने कहा कि कीट-कीस जैसे संस्थान मुख्यधारा की शिक्षा के साथ-साथ प्रौढ़ शिक्षा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। डॉ. सामंत ने कीस में अपनाए जा रहे विशिष्ट मॉडल पर प्रकाश डालते हुए कहा, “जब हमारे छात्र छुट्टियों में अपने गांव लौटते हैं, तो उन्हें कम से कम दस लोगों को साक्षर बनाने के लिए प्रेरित किया जाता है। शिक्षा तभी सार्थक होती है जब वह जमीनी स्तर तक पहुंचकर कई गुना बढ़े।” उन्होंने जनजातीय शिक्षा, कौशल विकास, स्वास्थ्य सेवा और व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्र में कीट और कीस के व्यापक योगदान की चर्चा करते हुए प्रौढ़ शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का प्रमुख माध्यम बताया। उद्घाटन समारोह में प्रो. एल. राजा, इंडियन एडल्ट एजुकेशन एसोसिएशन के अध्यक्ष; प्रो. राजेश, IAEA के निदेशक; प्रो. सरनजीत सिंह, कीट और कीस के कुलपति; तथा सुरेश खंडेलवाल, IAEA के महासचिव सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। इंडियन एडल्ट एजुकेशन एसोसिएशन का उद्देश्य लोगों के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देना, निरक्षरता और अज्ञानता के उन्मूलन के लिए कार्य करना, अंतर-राज्यीय सहयोग को प्रोत्साहित करना, आम जन के लिए साहित्य का निर्माण एवं वितरण करना तथा विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों को प्रौढ़ शिक्षा से सक्रिय रूप से जोड़ना है।
अशोक पाण्डेय
कीस में 66वें अखिल भारतीय प्रौढ़ शिक्षा सम्मेलन का हुआ शुभारंभ










