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“गरीब का सिक्का “

-अशोक पाण्डेय

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एक गरीब था। वह प्रतिदिन भिक्षा मांगकर अपना पेट भरता था। आनेवाले कल के विषय में नहीं सोचता कि कल क्या होगा? एक दिन उसे भिक्षा में एक सिक्का अधिक मिल गया। वह अब उस एक अतिरिक्त सिक्के को दान करना चाहा। तभी उसे पता चला कि उसके राज्य का राजा धन लूटने के लिए किसी दूसरे राज्य पर आक्रमण करने जा रहा है। गरीब राजा के पास जाकर अपना अतिरिक्त सिक्का दे दिया। राजा को अपनी ग़लती का अहसास हो गया और वह भिखारी को गले लगा लिया और धन-वैभव के लिए दूसरे राज्य पर आक्रमण का इरादा छोड़ दिया। साथ ही साथ उस गरीब को अपने राज्य के सलाहकार के रूप में रख लिया।

-अशोक पाण्डेय

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