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चिर.आर्यमन डालमिया का हुआ जनेऊ संस्कार

पुरी के गजपति महाराजा दिव्य सिंहदेव ने
महारानी लीलावती तथा राजकुमारी देबेसी देवी के साथ
पधारकर दिया दिव्य आशीष

भुवनेश्वरः29अप्रैलःअशोक पाण्डेय

21अप्रैल को भुवनेश्वर आईआरसी विलेज के एन-350,ओमनिवास पर चिर.आर्यमन डालमिया का जनेऊ संस्कार हुआ। उनके साथ डालमिया परिवार की ओर से एक गरीब ब्राह्मण-बच्चे का भी उसी शान-शौकत के साथ जनेऊ संस्कार संपन्न हुआ। पुरी के आचार्य पण्डित सूर्यनारायण रथशर्मा,वाराणसी के आचार्य तरुण शर्मा,मिथिला के आचार्य पवन झा तथा ओमनिवास के स्थाई पूजक आचार्य वेणुधर आदि ने जनेऊ संस्कार से संबंधित समस्त आध्यात्मिक अनुष्ठान पूरे विधि-विधान के साथ कराया। अवसर पर महाप्रभु के प्रथम सेवक तथा पुरी के गजपति महाराजा दिव्य सिंहदेव भी डालमिया-परिवार का निमंत्रण स्वीकारकर पधारे तथा महारानी लीलावती एवं राजकुमारी देबेसी देवी के साथ आर्यमन डालमिया तथा ब्राह्मण बच्चे को दिव्य आशीष प्रदान किया। जनेऊ संस्कार की जानकारी देते हुए आचार्य तरुण शर्मा ने बताया कि इसे उपनयन संस्कार तथा यज्ञोपवीत संस्कार भी कहते हैं।सनातनी परंपरा के अनुसार पुत्र  जब 12 से 14 वर्ष आयु का हो जाय तो उसका जनेऊ संस्कार कर देना चाहिए। उनके अनुसार पुत्र जब जन्म लेता है तो उसको तीन ऋण चुकाने पड़ते हैं,देव, ऋषि तथा पितृ ऋण।यही नहीं,जनेऊ संस्कार में पांच देवों, ब्रह्मा, विष्णु, शिव,यज्ञदेव तथा सूर्य की पूजा यहां पर संपन्न हुई है।ये सभी आज आर्यमन डालमिया तथा ब्राह्मण पुत्र को क्रमश: आत्मबल, समृद्धि, सुव्यवस्था, परमार्थ और पराक्रम प्रदान करेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जनेऊ के 9धागों में 9देवता निवास करते हैं, ओंकार, अग्नि,अनन्त, चन्द्र,पितृ, प्रजापति,वायु, सूर्य तथा समस्त देवगण। यज्ञोपवीत में 9शक्तियों का निवास होता है। उन्होंने बताया कि जनेऊ संस्कार के विषय में ऐसी मान्यता है कि जिस प्रकार इन्द्र को वृहस्पति ने जनेऊ दिया था उसी प्रकार बेटे की आयु, बुद्धि,बल और संपत्ति की वृद्धि के लिए आजीवन जनेऊ अवश्य धारण करना चाहिए। पण्डित सूर्यनारायण रथशर्मा ने बताया कि यह भुवनेश्वर का पहला डालमिया-परिवार है जो वैश्य होकर भी जनेऊ धारण करता है। उन्होंने अपने मुख्य यजमान उद्योगपति सुरेन्द्र कुमार डालमिया के नाम का उल्लेख किया जो आज भी जनेऊ धारण करते हैं।सभी आचार्यों के अनुसार मानव-जीवन में 16 संस्कारों में जनेऊ संस्कार का विशेष महत्त्व है जिसका अनुपालन करना चाहिए। आयोजन के क्रम में कर्णभेदन,केश-मुण्डन तथा भिक्षाटन का अनुपम दृश्य देखने को मिला। आयोजन में सादर आमंत्रित हैदराबाद से श्री लक्ष्मीनंदन सोनथालिया,तारा देवी,सुनील,रीचा,वंश और आराधना, वरुण चोखानी, नम्रता चोखानी, वेदिका,मनोज सोनथालिया, बनिता सोनथालिया,आशा कासेरा,सीय कासेरा,विनोद सोनथालिया,दीपाली सोनथालिया,रवींद्र अग्रवाल,सरिता अग्रवाल,राजू पोद्दार,झारसुगुडा,गोपाल डालमिया कोलकाता,समस्त डालमिया-परिवार,भुवनेश्वर,समस्त देवरालिया-परिवार, कटक, एवं कटक- भुवनेश्वर के अनेक उद्योगपति,समाजसेवी तथा विशिष्ट महानुभावगण मौके पर पधारकर चिर.आर्यमन डालमिया को जनेऊ संस्कार की बधाई दी। आयोजक डालमिया-परिवार भुवनेश्वर के श्री सुरेन्द्र कुमार डालमिया,श्रीमती साधना डालमिया,श्री विकाश डालमिया तथा श्रीमती लता डालमिया ने अपने ओमनिवास पर सादर पधारे सभी मेहमानों का आतिथ्य-सत्कार  पूरी आत्मीयता के साथ किया।ओमनिवास के समस्त सहयोगी कर्मचारियों का भी सहयोग सराहनीय था।

अशोक पाण्डेय

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