Header Ad

Categories

  • No categories

Most Viewed

जगन्नाथ धर्म और जगन्नाथ संस्कृति से संबंध रखनेवालों का यह स्पष्ट मत है कि इसमें जगन्नाथ के नाम संकीर्तन का सबसे अधिक महत्त्व है।

जगन्नाथ धर्म और जगन्नाथ संस्कृति से संबंध रखनेवालों का यह स्पष्ट मत है कि इसमें जगन्नाथ के नाम संकीर्तन का सबसे अधिक महत्त्व है। इस मृत्युलोक में जगन्नाथ ही आदिदेव हैं,आदि पुरुषोत्तम हैं।उनके नाम का स्मरण अमृत से भी श्रेष्ठतम है ।उनके नाम लेने का मतलब है-उनको पुकारना और वे भाव के भूखे हैं जो हमारी पुकार को अवश्य सुनते हैं। जगन्नाथ का नाम ही उनकी सच्ची भक्ति है,उनके चरणों में सच्चा प्रेम है और उनमें अटूट विश्वास है। जगन्नाथ का नाम भक्ति, प्रेम और श्रद्धा का महासमुन्दर है जिसमें आत्मविश्वास के साथ गोते लगाने से सभी ऐश्वर्य प्राप्त हो जाते हैं। जिस प्रकार राम -राम, कृष्ण-कृष्ण कहने वाला मोक्ष प्राप्त करता है ठीक उसी प्रकार कलियुग के एक मात्र पूर्ण दारुब्रह्म,ब्रह्मदारु भगवान जगन्नाथ ही हैं। इसलिए आप नारायण! नारायण!! कहते रहें जबतक जगन्नाथ जी आपको बोलने की शक्ति दिए हैं, सुनने की शक्ति दिए हैं, देखने की शक्ति दिए हैं,आपका हाथ-पांव चलता है तबतक आप जगन्नाथ नाम लेते रहें! जगन्नाथ नाम लेते हुए मानव सेवा,गो सेवा और ब्राह्मण सेवा करते रहें!वे यह भी कहते हैं कि भक्त उन पर विश्वास करें कि जगन्नाथ अपने भक्तों की आस्था और विश्वास हैं।वे कहते हैं कि वे सदा भाव के भूखे हैं।वे जब सर्वधर्म समन्वय के देव हैं तो सभी धर्मों के लोगों को उनके नाम का नित्य स्मरण करना चाहिए।
-अशोक पाण्डेय

    Leave Your Comment

    Your email address will not be published.*

    Forgot Password