-अशोक पाण्डेय
जल प्रिय भगवान जगन्नाथ की विजय प्रतिमा मदनमोहन आदि देवों की 21 दिवसीय बाहरी चंदनयात्रा श्री जगन्नाथपुरी धाम(ओड़िशा) के पवित्रतम चंदन तालाब में 30 अप्रैल अर्थात् अक्षय तृतीया के दिन से अपराह्न बेला में इस वर्ष भी अनुष्ठित होगी जो 21 दिनों तक चलेगी।कुल लगभग तीन एकड़ में अवस्थित चंदन तालाब को नरेन्द्र तालाब तथा नरेन्द्र पुष्करिणी भी कहा जाता है। यह चंदन यात्रा पुरी धाम में लगभग एक हजार वर्षो से नरेन्द्र तालाब में परम्परागत तरीके से अनुष्ठित होती है।गौरतलब है कि यह चंदनयात्रा भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा से जुड़ी यात्रा है जिसमें भगवान जगन्नाथ के जल प्रिय स्वरुप को दो चरणों में अनुष्ठित किया जाता है। एक 21 दिवसीय बाहरी चंदनयात्रा तथा दूसरी 21 दिवसीय श्रीमंदिर भीतरी चंदन यात्रा जिसके अंतिम दिन उत्सव को देव स्नानपूर्णिमा के नाम से जाना जाता है।
चंदन यात्रा को देखने के लिए देश-विदेश के लाखों श्रद्धालु प्रतिवर्ष जगन्नाथ भक्त पुरी धाम आते हैं। सबसे खुशी की बात इस संबंध में यह है कि पूरे एक महीने तक वे भक्त पुरी धाम में ही वास करते हैं,महोदधि स्नान करते हैं,पुरी धर्मकानन का परिभ्रमण करते हैं। भगवान जगन्नाथ के श्रीमंदिर जाने से पूर्व मंदिर की परिक्रमा करते हैं तथा सायंकाल चंदन तालाब के समीप 21 दिनों तक बैठकर चंदनयात्रा का अलौकिक आनंद लेते हैं।चंदन तालाब को पूरी तरह से स्वच्छ तथा शीतल बना दिया जाता है। उसके आसपास की जगह को साफ-सूथरी कर दी जाती है। चंदन तालाब के चारों तरफ बिजलीबत्ती की रोशनी से पूरी तरह से आलोकित कर दिया जाता है।
गौरतलब है कि जगत के नाथ भगवान जगन्नाथ भोजन प्रिय देव हैं जो प्रतिदिन 56 प्रकार के भोग ग्रहण करते हैं। वे वस्त्र प्रिय कलियुग के एकमात्र पूर्ण दारुब्रह्म देव हैं जो प्रतिदिन अपनी रुचि के अनुसार वस्त्र धारण करते हैं।ठीक उसी प्रकार वे जल प्रिय देव भी हैं और उसी का यह प्रत्यक्ष प्रमाण है उनकी विजय प्रतिमा मदनमोहन आदि देवों की 21दिवसीय बाहरी चंदनयात्रा। जैसाकि हम सभी जानते हैं कि इस धरती पर तीन ही वास्तविक रत्न हैं-जल,अन्न और मधुर वाणी जिसको भगवान जगन्नाथ एक साधारण मानव के रुप में साकार करते हैं। वे साधारण मानव की तरह ही सुख-दुख का अनुभव करते हैं।वे वैशाख-जेठ मास की भीषण गर्मी से परेशान होकर चंदन तालाब में कुल 21 दिनों तक शरीर और मन की शीतलता प्राप्ति हेतु चंदन का लेप लगाकर मलमलकर स्नान करते हैं।नौका विहार करते हैं और कुछ देर तालाब के बीचोंबीच निर्मित अपने चंदन घर में विश्राम करते हैं। वे प्रतिदिन मध्यरात्रि बेला में अपने श्रीमंदिर लौट भी आते हैं।
अक्षय तृतीया के दिन से अर्थात् 30 अप्रैल से श्रीमंदिर पुरी की समस्त रीति-नीति के तहत जातभोग संपन्न कर अपराह्न बेला में भगवान जगन्नाथ की विजय प्रतिमा मदनमोहन,रामकृष्ण,बलराम,पंच पाण्डव, लोकनाथ, मार्कण्डेय, नीलकण्ठ,कपालमोचन,जम्बेश्वर लक्ष्मी, सरस्वती आदि को शोभायात्रा के मध्य पुरी नगर परिक्रमा कराकर चंदन तालाब लाया जाता है। भगवान जगन्नाथ की विजय प्रतिमा मदनमोहन, रामकृष्ण, लक्ष्मी,सरस्वती आदि को स्वतंत्र पालकी में आरुढ कराकर श्रीजगन्नाथ मंदिर की 22 सीढियों पर लाया 21 दिनों तक (अक्षय तृतीया के दिन से आरंभ )जाता है।शोभायात्रा अलौकिक होती है जिसमें प्रतिदिन 21 दिनों तक आगे-आगे परम्परागत बनाटी रण-कौशल प्रदर्शन,तलवार चालन,पाईक नृत्य और भजन-संकीर्तन के मध्य देव प्रतिमाओं को चंदन तालाब लाया जाता है जहां पर पहले से ही गजदंत आकार की नौकाएं एकसाथ जोडकर तथा हंस के आकार की तैयार कर तथा पूरी तरह से सजाकर रखी रहतीं हैं।पूरे 21 दिनों तक देवों को उन नौकाओं में आरुढ कराकर चंदन तालाब के एक छोर से दूसरे छोर तक नौका विहार कराया जाता है। चंदन तालाब के मध्य अवस्थित चंदनघर ले जाकर उन्हें प्रतिदिन अक्षय तृतीया के दिन से 21 दिनों तक उनके शरीर पर चंदन का लेप लगाकर सुवासित जल से उन्हें पवित्र स्नान कराया जाता है।नौका विहार कराया जाता है। चंदनघर में कुछ देर विश्राम कराकर देव प्रतिमाओं को श्रीमंदिर लाया जाता है।इसप्रकार जल प्रिय जगत के नाथ भगवान जगन्नाथ की विजय प्रतिमा मदन मोहन आदि देवों की 21 दिवसीय बाहरी चंदन यात्रा निराली होती है।
अशोक पाण्डेय
जगन्नाथ भगवान की विजय प्रतिमा मदनमोहन की 21 दिवसीय बाहरी चंदनयात्राः2025-एक अवलोकन
