-अशोक पाण्डेय
———————–
जीवन में भोजन और भजन का महत्त्वपूर्ण स्थान है। श्रीमद् भागवत में बताया गया है कि हम जैसा भोजन करते हैं वैसा ही हमारा मन हो जाता है,हमारा जीवन हो जाता है। भजन का भी संबंध भोजन से जुड़ा है। अगर एक गरीब व्यक्ति को भजन की आदत लग जाय तो वह उन अमीरों से बड़ा हो जाता है जो केवल धन के लोभ में जीवनभर लगे रहते हैं और उन्हें जीवनभर शांति नहीं मिलती। सुदामा के पास खाने के लिए कुछ भी नहीं था फिर भी संतोष के साथ चौबीसों घंटे कृष्ण -कृष्ण भजते रहते थे। मेरा यह मानना है कि आप संतोषी बनकर जो कुछ शाकाहारी भोजन मिल जाय खाकर व ठंडा पानी पीकर सत्कर्म करते रहें और हरिगुन गाते रहें!
-अशोक पाण्डेय










