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“जिज्ञासा”

-अशोक पाण्डेय
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“जिज्ञासा”सबसे पहले बच्चे में पैदा होती है अर्थात् कोई चीज क्या है? क्यों है? कैसे है? किसके लिए है? किस काम की है? आदि- आदि जानने की इच्छा। यही इच्छा शक्ति विवेकानंद जी को विश्ववंद्य आध्यात्मिक गुरु बना दिया।भारत के स्वर्गीय राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम को उनकी कल्पनाओं को साकार करने वाला युगपुरुष बना दिया। इसीलिए आप भी अपने बच्चों की जिज्ञासा को बढ़ावा दें! वैसे शिक्षक रखें जो आपके बच्चे की जिज्ञासा को बढ़ाये।आज के भारत की शिक्षा नीति में भी इसका प्रावधान होना चाहिए।इस जिज्ञासा में सहयोग आपको आजीवन ईश्वर भी प्रदान करते हैं।
एक रोचक लघु कथा सुनें!
एक बालक नवजात शिशु से अपनी युवावस्था में जैसे ही प्रवेश किया उसने अनुभव किया कि वह जहां -जहां जाता है उसके पदचिह्न बनते जाते हैं। वही जब बूढ़ा हो गया तो उसके पदचिह्न नहीं बने। कालांतर में वह स्वर्गलोक चला गया। वहीं भी वह अपनी जिज्ञासावश ईश्वर से पूछा कि उसके पदचिह्न बुढ़ापे में क्यों नहीं दिखाई दिए? ईश्वर ने बताया कि जब वह बालक छोटा था,जवान था उस वक्त वे उस बालक के साथ -साथ चलते रहे इसीलिए उसके पदचिह्न दिखाई देते रहे लेकिन बुढ़ापे में वह नहीं ईश्वर उसको चलाते रहे इसीलिए उसका पदचिह्न नहीं बना।
मान्यवर, अपने पदचिह्न को यादगार बनाने के लिए अपनी इच्छाशक्ति के साथ अच्छे कर्म करें!
-अशोक पाण्डेय

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