जिसकी चर्चा वेदों ने की है, पुराणों ने की है, रामायण और महाभारत में जिनका जिक्र है वही भगवान जगन्नाथ, पुरुषोत्तम आपके इष्टदेव हैं। श्रीरामचरितमानस के उत्तर काण्ड में एक प्रसंग के अनुसार जब मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम लंकापति रावण का वधकर अयोध्या लौटे तो अपने मित्र विभीषण से निवेदन किए कि वे भगवान जगन्नाथ की आराधना आजीवन अवश्य करें। गौरतलब है कि आज भी जगन्नाथ मंदिर में भक्त विभीषण द्वारा भगवान जगन्नाथ की नित्य पूजा का प्रावधान है।
मान्यवर,आगामी 13 अप्रैल तक कोई शुभ कार्य नहीं होगा। ऐसे में भगवान जगन्नाथ जी से यही प्रार्थना है कि वे सभी का मंगल करें!
आपका आज मंगल ही मंगल अवश्य होगा।
-अशोक पाण्डेय








