-अशोक पाण्डेय
मनुष्य का जीवन आजीवन सीखने और सीख को अपनाने का एकमात्र केन्द्र है। लेकिन इस सृष्टि की रचना का अनोखा रहस्य यह है कि लगभग सभी एक -दूसरे को ठगते हैं। लेकिन जब किसी मशहूर ठगबाज को भी कोई ठग देता है तो विचारणीय बात हो जाती है।
एक जौहरी था। वह अपने हीरे के व्यापार के सिलसिले में सात दिनों के लिए बाहर निकला। एक ठगबाज उसका पीछा किया। रास्ते में जौहरी एक धर्मशाला में रुका। ठगबाज भी उसी धर्मशाला में रुका। दोनों में दोस्ती हो गई। दोनों धर्मशाला में सात दिन ठहरे। ठगबाज प्रत्येक रात जौहरी के सामान को देखता रहा लेकिन उसे कुछ भी नहीं मिला। जब दोनों एक-दूसरे से अलग होने लगे तो ठगबाज ने जौहरी से पूछा कि वह अपना हीरा- जवाहरात कहां छिपाकर रखा था। जौहरी ने कहा कि जब रात आती तो वह अपना हीरा- जवाहरात अपनी कमीज़ की चोर- जेब में रख देता था। ठगबाज ने अपना परिचय दिया कि वह एक नामी ठगबाज है पर जौहरी तो उस ठगबाज का भी महागुरु निकला।
-अशोक पाण्डेय










