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बुद्धपुरुषः प्रोफेसर अच्युत सामंत की आध्यात्मिक दिनचर्याः वंदनीय और अनुकरणीय

-अशोक पाण्डेय

स जातो येन जातेन देशो याति सम्मुनतिम्
अर्थात् उसी का जन्म लेना सार्थक है जो अपने देश और अपने राष्ट्र को उन्नति और प्रगति के लिए समर्पित हो। बुद्धपुरुषः प्रोफेसर अच्युत सामंत के आध्यात्मिक दिनचर्या की समीक्षा करने पर यह पता चला कि उनका जीवन उनके द्वारा प्रतिपल सर्वोत्तम करने में व्यतीत होता है।उनका का सांसारिक शरीर प्रतिदिन जल से मलमलकर स्नान करने से जहां पवित्र होता है वहीं उनका निश्छल मन प्रतिदिन सत्य से पवित्र होता है।एक तरफ उनकी बुद्धि प्रतिदिन सद्ज्ञान से पवित्र होती है तो वहीं उनकी आत्मा प्रतिदिन धर्म-कर्म से पवित्र होती है। भारत के ओड़िशा राज्य की राजधानी भुवनेश्वर स्थित विश्वविख्यात कीट-कीस-कीम्स के प्राणप्रतिष्ठाता हैं महान् शिक्षाविद् प्रोफेसर अच्युत सामंतजी। एक अनौपचारिक साक्षात्कार में प्रोफेसर सामंत ने बताया कि उनकी असाधारण कामयाबी के पीछे उनकी स्वर्गीया माताजी नीलिमारानी सामंत के साथ-साथ उनकी आध्यात्मिक दिनचर्या तथा वर्तमान में उनके दूरदर्शी निर्णयों का ही रहा है।ऐसे में, अच्युत सामंत के आध्यात्मिक दिनचर्या की अगर निष्पक्ष भाव से समीक्षा की जाय तो यह निर्विवाद रुप से कहा जा सकता है कि उनकी आध्यात्मिक दिनचर्चा नित्य प्रातः वंदनीय और अनुकरणीय दिनचर्या है।वे पूरी तरह से विदेह जीवनयापन करते हैं और अपने जीवन की अनुकूल और प्रतिकूल परिस्थितियों में समभाव से सहज रुप में मुस्कराते हुए नजर आते हैं। वे प्रतिदिन सुबह में उठकर अपने दैनिक कार्यों से निवृत्त होकर सबसे पहले अपनी गौमाता के दर्शन करते हैं। अपने निवासस्थल के सभी देवी-देवताओं की विधिवत पूजा करते हैं। साथ ही साथ वे पूरे विधि-विधान से अपने जीवन की पहली गुरु अपनी स्वर्गीया माताजी नीलिमारानी सामंत की पूजा करते हैं।अपने स्वर्गीय पिताजी अनादिचरण सामंता की पूजा करते हैं।साथ ही साथ सत्य, अहिंसा और त्याग के पुजारी राष्ट्रपिता महात्मागांधी की पूजा करते हैं। अपनी आध्यात्मिक दिनचर्या के तहत वे वाणीक्षेत्र अपने जगन्नाथ मंदिर प्रांगण में जाकर भगवान जगन्नाथ समेत कुल 25 अन्य देवी-देवताओं की पूजा समस्त पूजकों के मंत्रोच्चारण के साथ करते हैं।कीट-कीस-कीम्स के कल्याण और सतत विकास के लिए कार्य करनेवाले अच्युत सामंत जी कीस प्रांगण में एक कदंब के पेड़ के नीचे अपना दफ्तर बनाकर 10-10 घण्टे कार्य करते हैं।साथ ही साथ वे प्रतिदिन 4-4 घण्टे जनहित,लोकहित,समाजहित,प्रदेश हित तथा राष्ट्रहित से संबंधित कार्य भी निःस्वार्थभाव से करते हैं। महान् शिक्षाविद् प्रोफेसर अच्युत सामंत की अति विशेष आध्यात्मिक दिनचर्या की बात करें तो वे प्रति महीने की पहली तारीख को भोर में जगन्नाथपुरी धाम जाकर भगवान जगन्नाथ के दर्शन है। वे प्रति महीने के अंतिम शनिवार के दिन पुरी धाम जाने के रास्ते में सिरुली जाकर सिरुली हनुमानजी के दर्शन करते हैं।साथ ही साथ प्रति महीने अपने पैतृक गांव कलराबंक जाकर अपने द्वारा निर्मित श्रीरामदरबार मंदिर में विधिवत पूजा करते हैं। समय-समय पर वे वहां पर यज्ञ अनुष्ठित करते हैं। सर्वधर्म समन्वय संगोष्ठी आयोजित करते हैं।अपने भुवनेश्वर के निवास पर प्रतिमाह की संक्रांति के दिन संगीतमय अखण्ड सुंदरकाण्ड पाठ आयोजित करते हैं।भुवनेश्वर यूनिट-1 स्थित 108 हनुमान मंदिर में अपने गुरु बाबा रामनारायण दास द्वारा सुंदरकाण्ड पाठ आयोजित करते हैं। साथ ही साथ प्रतिमाह भुवनेश्वर के अनेक हनुमान मंदिरों में भजन-संकीर्तन के साथ-साथ सामूहिक प्रसादसेवन भी कराते हैं। पुरी धाम के समीप भी ब्रह्मगिरि में वे नियमित पूजा-पाठ कराते हैं। प्रोफेसर अच्युत सामंत के आध्यात्मिक दिनचर्या की सबसे अनोखी बात यह है कि वे अपने स्वर्गीय पिताजी अनादिचरण सामंत तथा अपनी माताजी स्वर्गीया नीलिमारानी सामंत की जयंती और श्राद्ध अकेले मनाते हैं। उस दिन वे अपने स्व.पिताजी और अपनी स्व.माताजी की पसंद के भोजन अपने हाथों से पकाकर अपने निवास के उत्तर दिशा में विधिवत कौवों को खिलाते हैं। साथ ही साथ ब्राह्म्णों को सादर आमंत्रितकर उनको अपने हाथों से भोजन कराते हैं तथा दान-दक्षिणा देते हैं। यहीं नहीं, समय-समय पर पुरी गोवर्द्धन मठ के 145वें पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाभाग को कीट-कीस में सादर आमंत्रितकर उनका दिव्य प्रवचन कीट-कीस के कुल अस्सी हजार बच्चों और युवाओं को सुनाते हैं। पुरी धाम के गजपति महाराजा श्री श्री दिव्य सिंहदेवजी,भगवान जगन्नाथ के प्रथमसेवक को वाणीक्षेत्र अपने जगन्नाथ मंदिर में सादर आमंत्रितकर उकी अध्यक्षता में सर्वधर्म समन्वय संगोष्ठी भी आयोजित करते हैं।यही नहीं,अपनी संस्थाओं कीट-कीस-कीम्स में समय-समय पर विश्वविख्यात धर्माचार्यों को सादर आमंत्रित कर उनके आध्यात्मिक व जीवनोपयोगी प्रवचनों का भी आयोजन प्रोफेसर अच्युत सामंत करते हैं। समय-समय पर अच्युत सामंतजी का अयोध्या,बनारस,तिरुपति और भारत के अनेकानेक तीर्थस्थलों में जाना और वहां पर पूजा-पाठ करना महान् शिक्षाविद् प्रोफेसर अच्युत सामंत की आध्यात्मिक चेतना को स्पष्ट करता है।इसप्रकार बुद्धपुरुषः प्रोफेसर अच्युत सामंत की आध्यात्मिक दिनचर्याः वंदनीय और अनुकरणीय है।
अशोक पाण्डेय

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