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भारतीय नारी ही भारतीय नर की सच्ची प्रेरणा है -एक नई सोच

-अशोक पाण्डेय
यह जीवन का सबसे बडा शाश्वत सत्य है कि इस सृष्टि की जन्मदात्री नारी ही है। भारतीय नारी ही भारतीय नर की सच्ची प्रेरणा है। नारी अपने अच्छे-बुरे विभिन्न स्वभावों को लेकर एक मां,एक पत्नी,एक बहन और एक नारी की भूमिका निभाती है। वह भारतीय परिवार और समाज की वात्सल्य,ममता,दुलार,स्नेह और प्रेम की साक्षात प्रतिमूर्ति है।वह भारतीय समाज में अपने स्वभाव के बदौलत सबला और अबला दोनों रुपों में जानी जाती है। नारी के सहज स्वभाव में निम्न गुणःअपने बच्चे के सर्वांगुण विकास के लिए,शाश्वत जीवन मूल्यों को प्रदान करनेवाली सृष्टि की प्रथम शिक्षिका का गुण, मधुर वाणी बोलनेवाली, साहसी, पतिव्रता, साहस, निडरता, वीरता,चातुर्य ,त्याग, क्षमा, करुणा, दया, विनम्रता, धार्मिकता,ईश्वर और प्रकृति पर विश्वास,संचय करने की मनोप्रवृत्ति ,विपत्ति में धीरज धारण करनेवाली विलक्षण स्वभाव जैसे अनगिनत सद्गुणों की प्रत्यक्ष प्रेरणा के रुप में है।लेकिन नारी और जिन्दगी के विषय में यह भी कहा गया है कि नारी और जिन्दगी मनुष्य-जीवन की एक अनबूझ पहेली है जिसे जानने और समझने के लिए पुरुष बार-बार जन्म लेता है फिर भी उन दोनों को ठीक से समझ नहीं पाता है। नारी स्वभाव के गहन अध्ययन से पता चला कि नारी पुरुषों की तुलना में बहुत अधिक संवेदनशील होती है। इसीलिए जब नारी के अच्छे स्वभाव को पुरुष अपना लेता है तो वह महात्मा बन जाता है। वह पुरुष सज्जन स्वभाव, नेक स्वभाव,सहृदय स्वभाव,विवेकी स्वभाव और संवेदनशील स्वभाव का असाधारण पुरुष बन जाता है जो दूसरों के लिए रोलमॉडल भी बन जाता है। नारी अपने अच्छे स्वभाव के बदौलत गृहलक्ष्मी कहलाती है। अन्नपूर्णा कहलाती है। इसीलिए जिस घर में महिलाओ की पूजा होती है(उसका मान-सम्मान और इज्जत होती है), उस घर में देवता का निवास होता है। किसी कारणवश अगर किसी घर में नारी(पत्नी)नहीं होती है वह घर भूत का डेरा बन जाता है। माता के रूप में नारी को स्वर्ग से भी महान बताया गया है। नारी ‘आदिशक्ति’ है।नारी अपने अच्छे चरित्र तथा अच्छे स्वभाव से अपने घर को स्वर्ग बनाती है।जयशंकर प्रसाद लिखते हैं कि नारी श्रद्धा का एक रूप है।नारी अपने सद्गुणों के बदौलत आदर्श नारी सीता और सावित्री है। लेकिन अगर आज के परिपेक्ष्य में नारी के स्वभाव का अगर वास्तविक मूल्यांकन किया जाय तो नारी अपने शाश्वत व्यक्तिगत सद्गुणों को छोडकर अनेक दुर्गुणों की शिकार बनती जा रही है जिसके फलस्वरुप भारत का संयुक्त परिवार समाप्तप्राय हो चुका है। पहले भारत के संयुक्त परिवार को सामाजिक गुणों की शाश्वत पाठशाला कहा जाता था वह अब नारी स्वभाव की दुर्बलता के कारण एकाकी परिवार के रुप में तेजी से बदलते जा रहा है। नारी स्वभाव के इस स्वार्थी कदम को आगे बढाने में उसके अपने पति का भी सहयोग भी कदापि कम नहीं माना जा सकता है। जिस नारी के दुतकार से अनन्य पत्नीप्रेमी तुलसी,गोस्वामी तुलसीदास बन गये वे नारी के गुणों और अवगुणों के विषय में अपने कालजयी महाकाव्य रामचरितमानस में लिखते हैं कि नारी-स्वभाव का सबसे बडा दोष है बिना बात के झूठ बोलने का स्वभाव। आज भारत का पुरुष प्रधान समाज झूठ बोलने की उस संस्कृति को बडे शौक से अपना रहा है। यह कहें कि अपना चुका है तो कोई गलत बात नहीं होगी। –
झूठइ लेना,झूठइ देना,
झूठइ ही भोजन,
झूठ चबेना।
-आज के पुरुष का सहज स्वभाव बन चुका है। आज का पुरुष शौक से झूठ बोलता है और झूठ बोलकर अपने आपमें गर्व महसूस करता है। नारी के आंसू भी कमाल के होते हैं। वे तो जैसे बिन बादल बरसात हों। क्षणभर में रुठ जाना तथा क्षणभर में ही मान जाना नारी स्वभाव का एक और सबसे बडा दोष है। जिस प्रकार किसी नारी के पेट में कोई बात नहीं पचती है,ठीक उसी प्रकार आज पुरुष के पेट में भी कोई बात नहीं पचती है। इसीलिए आज के भारतीय समाज में जयचंदों की भी कोई कमी नहीं है। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस के एक प्रसंग में दुराचारी रावण अपनी पत्नी मंदोदरी को कहता है कि स्त्रियां छल-कपट और माया रचने में माहिर होती हैं। आज भारत का पुरूष प्रधान समाज तो छल-कपट,प्रपंच और माया के स्वभाव के प्रयोग में मंदोदरी के स्वभाव को भी पीछे छोड चुका है।कहते हैं कि कोई-कोई नारी आवश्यकता से कहीं अधिक मायावी स्वभाव की होती हैं,चंचल मना होती हैं,निर्दयी होती हैं।डरपोंक और अविवेकी स्वभाव की होतीं हैं जिसका नुकसान भारतीय समाज को उठाना पडता है। ठीक इसीप्रकार आज के भारतीय समाज के कुछ पुरुष भी आवश्यकता से अधिक मायावी स्वभाववाले बन चुके हैं,चंचल मना बन चुके हैं,निर्दयी बन चुके हैं,डरपोक और अविवेकी स्वभाववाले बन चुके हैं।दया,धर्म,दान-पुण्य,कथा-वार्ता तो कम हो चुका है। लेकिन राम कल भी थे आज भी हैं और आनेवाले दिनों में भी रहेंगे। सीता कल भी थीं,आज भी हैं और आनेवाले कल के दिनों में भी रहेंगी। रावण कल भी था और आज भी है।आज की नारी को सीता और सावित्री बनना होगा। आज के भारतीय नारी को वीरांगना लक्ष्मीबाई बनना होगा। आज के भारतीय नारी को पुरुषों के साथ-साथ कंधे से कंधा लगाकर भारत को विकसित बनाना होगा। आज के भारतीय नारी को हरप्रकार से भारतीय पुरुष प्रधान समाज की वास्तविक प्रेरणा बनना होगा जिनका अनुसरण कर आज का पुरुष प्रधान समाज सन्मार्ग पर चल सके और हमसब गर्व से पूरी दुनिया को बता सकें कि हमसब भारतवासी हैं जहां के नर की सच्ची प्रेरणा नारी ही है।
-अशोक पाण्डेय

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