

आज की कथा पूरी तरह से चित्रकूट में राम-भरत-मिलन प्रसंग पर ही केन्द्रित रही
भुवनेश्वरः24जुलाईःअशोक पाण्डेयः
भुवनेश्वर, हरिबोल परिवार द्वारा आयोजित रामकथा का छठा दिवस रामचरित मानस में वर्णित चित्रकूट में राम-भरत-मिलन प्रसंग पर पूरी तरह से केन्द्रित रही।आज की कथा में अनुशासित श्रोतागण लगातार चार घण्टे तक हाथ जोडकर और रामकथा श्रवण करते हुए नजर आये। वहींआयोजक हरिबोल परिवार भुवनेश्वर के सुभाष गुप्ता तो कथाक्रम में प्रसंगानुसार आध्यात्मिक आनंद में नृत्य करते हुए तथा व्यासपीठ के समीप हाथजोडे खडे नजर आये। आज की कथा में वृंदावनवाले कथाव्यास गिरिधर गोपाल शास्त्री तथा उनकी गायकी टोली ने रामकथा के साथ-साथ अपनी सुमधुर भजनगायकी द्वारा सभी को राममय बना दिया। कथाव्यास ने बताया कि राम से मिलने के लिए भरतलाल जी जब चित्रकूट अपनी सभी माताओं के साथ आते हैं तो लखनलाल को संदेह होता है कि कहीं भरत लाल जी किसी गलत इरादे से तो चित्रकूट नहीं आये हैं लेकिन उनकी सारी शंकाओं का समाधान राम करते हैं। कथाव्यास ने बताया कि राम-भरत-मिलन एक अलौकिक और दिव्य क्षण था जिसकी कथा सुनकर सभी श्रोता भावविभोर हो गये। उन्होंने बताया कि भरतलाल जी पहले तो राम को वापस अयोध्या लौटने की राम से याचना करते हैं लेकिन जब राम नहीं मानते हैं तो वे राम की चरणपादुका अपने माथे पर लेकर अयोध्या लौटते हैं। कथाक्रम में गुरुजी ने कुछ लौकिक मान्य मान्यताओं को जैसे किसी काम से अथवा काम पर जाने के लिए घर से निकलते समय,कोई शुभकार्य करते समय तथा पूजा करते समय पर कुछ मान्य बातों का सदा ध्यान रखने की बात बताई।
-अशोक पाण्डेय









