अशोक पाण्डेय,राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त.
अब समय आ चुका है जब भारत का प्रत्येक युवा महान् शिक्षाविद् प्रोफेसर अच्युत सामंत के विदेह जीवन और विलक्षण व्यक्तित्व से प्रेरणा ले सकें।अतिथिदेवोभव राज्य ओड़िशा की महाप्रभु लिंगराज की पावन नगरी राजधानी भुवनेश्वर स्थित विश्वविख्यात दो शैक्षिक संस्थाओं कीट-कीस के वे संस्थापक हैं(1992-93 में)।आज 59वर्षीय प्रोफेसर अच्युत सामंत की वह शैक्षिक पहल कीट-कीस दो डीम्ड विश्वविद्यालय बन चुके हैं। कीट डीम्ड विश्वविद्यालय,भुवनेश्वर एक तरफ जहां तकनीकी और उच्च शिक्षा के पठन-पाठन का आदर्श बन चुका है वहीं कीस डीम्ड विश्वविद्यालय दुनिया का सबसे बड़ा आदिवासी आवासीय डीम्ड विश्विद्यालय बनकर भारत का दूसरा शांतिनिकेतन बन चुका है जहां पर चरित्रवान,जिम्मेदार और प्रतिभावान नागरिक तैयार किये जाते हैं। कीस की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि यह है कि वह शैक्षिक संस्थान मानव निर्माण हेतु एक कारखाना है जहां से अबतक लगभग एक लाख बेसहारे,अनाथ,उपेक्षित और सम्यक विकास से वंचित आदिवासी बच्चे स्वावलंबी बनकर भारत मां की सेवा कर रहे हैं। महान् शिक्षाविद् प्रोफेसर अच्युत सामंत की इसी शैक्षिक पहल तथा निःस्वार्थ लोकसेवा के बदौलत भारत समेत दुनिया की तमाम नामचीन विश्वविद्यालयों से उन्हें अबतक कुल 65 मानद डॉक्टरेट की डिग्री मिल चुकी है।उनके विलक्षण,अनुकरणीय,परोपकारी और आदर्श व्यक्तित्व की सबसे बड़ी खूबी उनकी सादगी, सरलता, संयम,सत्यनिष्ठा,आत्मीयता,धार्मिक जीवनयापन तथा परोपकारी स्वभाव है। सच कहा जाय तो प्रो. सामंत अपने सत्कर्मों के चलते ही पारदर्शी व्यक्तित्व के धनी बन चुके हैं,महान बन चुके हैं जिनका अनुकरण आज प्रत्येक युवा-युवती के लिए विकसित भारत के निर्माण हेतु परम आवश्यक है।वे अपनी सकारात्मक सोच के चलते कीट-कीस-कीम्स समेत भारत के शक्तिबोध और सौंदर्य बोध की अभिवृद्धि के लिए सतत सजग और जागरुक हैं। वे तपस्वी राजा राम की तरह करुणानिधान हैं। वे तन-मन से पूरी तरह से स्वस्थ हैं। वे एक स्वस्थ मस्तिष्क वाले जनहित,लोकहित और भारतवर्ष राष्ट्र हित के लिए दूरदर्शी व विलक्षण व्यक्तित्व हैं।भारतीय खेलों को असाधारण रुप से बढ़ावा देकर वे अनेक ओलंपियन तैयार करनेवाले प्रथम खेलप्रेमी संस्थापक हैं। उनकी आगे बढ़ने की इच्छा शक्ति भी कमाल की है। वे हमेशा यह मानते हैं और बताते भी हैं कि उनकी सतत आगे बढ़ने की प्रतियोगिता उनकी स्वयं से ही रहती है,किसी अन्य से कदापि नहीं।इसीलिए वे सभी के मित्र भी हैं।वे यह भी कहते हैं कि प्रत्येक भारतवासी को कृतज्ञ बनने की आज आवश्यकता है न कि कृतध्न बनने की। लाखों अड़चनों के बावजूद की वे सदैव मुस्कराते हुए आगे बढ़ते रहते हैं।वे बड़े ही पारखी स्वभाव के हैं। वे दूसरों की अच्छाइयों को अपना ले लेते हैं।वे बड़े ही विनम्र तथा मिलनसार स्वभाव के हैं। उनका आत्मविश्वास, सत्यनिष्ठा, संयम,धीरज,त्याग और प्रतिपल कुछ नया और सर्वश्रेष्ठ करने की चाहत ही उनको आज महान बना दी है। उनका लोकजीवन निःस्वार्थभरा जीवन है।वे एक तरफ जहां स्वयं आगे बढ़ते हैं तो वहीं वे दूसरों को भी आगे बढ़ने का सुअवसर प्रदान करते हैं। वे कठोर परिश्रमी तथा पुरुषार्थी व्यक्ति हैं।वे कौन बनेगा करोड़पति के हॉटशीट के कर्मवीर हैं जो पूरी तरह से अनुशासित,चरित्रवान तथा दृढ़ संकल्प शक्तिवाले हैं।इसीलिए यह कहना कोई अतिशयोक्ति की बात नहीं होगी कि महान् शिक्षाविद् प्रोफेसर अच्युत सामंत के विदेह जीवन और विलक्षण व्यक्तित्व से भारत के प्रत्येक युवा-युवती को प्रेरणा लेनी चाहिए।
-अशोक पाण्डेय