-अशोक पाण्डेय
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ज्ञान की प्राप्ति मात्र ही विद्या नहीं है। “सा विद्या या विमुक्तये”-अर्थात् विद्या वही है जो दुःखों -कष्टों तथा परेशानियों से स्थाई रूप से छुटकारा दिलाए। वास्तव में शिक्षा प्राप्त करने के दो मुख्य साधन हैं: एक, दृश्य और दूसरा श्रव्य। लेकिन याद रखें कि अगर आपका मन अर्थात् अन्त:करण अगर गंदा अथवा चंचल है तो ये दोनों साधन विद्या प्राप्ति नहीं करा सकते हैं। मेरा यह मानना है कि शिक्षा औपचारिक और अनौपचारिक होती है जिसमें मनुष्य जीवन को सार्थक बनाती है अनौपचारिक शिक्षा। गुरु कुल परम्परा से ही गुरु शिष्य के तादात्म्य संबंध से औपचारिक और अनौपचारिक शिक्षाएं प्रदान की जाती रही हैं। आज ज्ञानार्जन का सदुपयोग परोपकार के लिए करने की आवश्यकता है। हमारे ऋषि- मुनियों ने भी कहा है कि सत्य ही विद्या का प्रकाश है। इसीलिए सत्यनिष्ठ बनिए, सत्यवादी बनिए और अपने अर्जित विद्या का प्रयोग बहुजन हिताय और बहुजन सुखाय में ही लगाइए।
-अशोक पाण्डेय










