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विश्व भारत की एसडीजी स्थानीयकरण की कहानी की कर रहा सराहना: नीति आयोग के उपाध्यक्ष कीस, भुवनेश्वर में एकदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी

भुवनेश्वर, 24 जनवरी: संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के स्थानीयकरण के प्रति भारत के दृष्टिकोण को विश्व स्तर पर सराहना मिल रही है। यह बात नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने शनिवार को कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (कीस) में आयोजित एसडीजी पर एकदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में कही। उन्होंने कहा कि भारत ने “एक ही मॉडल सब पर लागू” करने की सोच से आगे बढ़ते हुए वैश्विक एसडीजी लक्ष्यों को स्थानीय परिस्थितियों और आवश्यकताओं के अनुरूप ढालने का सफल प्रयास किया है। ‘कीस बनाम सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी): परिवर्तनकारी शिक्षा, स्वयंसेवकता और समुदाय-केंद्रित कार्रवाई के माध्यम से भारत के एसडीजी एजेंडा को आगे बढ़ाना’ विषयक इस संगोष्ठी में ऐसे संस्थागत मॉडलों पर चर्चा हुई जो वैश्विक विकास लक्ष्यों को स्थानीय स्तर पर मापनीय और प्रभावी कार्रवाई में बदलते हैं। ओडिशा से अपने जुड़ाव को याद करते हुए श्री बेरी ने कहा कि यह यात्रा उनके लिए विशेष रूप से स्मरणीय रहेगी। उन्होंने केआईआईटी,कीट और कीस के संस्थापक डॉ. अच्युत सामंत की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा-आधारित विकास मॉडल के माध्यम से उन्होंने ओडिशा सहित देशभर के आदिवासी बच्चों के जीवन में व्यापक परिवर्तन लाया है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि एसडीजी का स्थानीयकरण ‘विकसित भारत’ के विज़न का एक केंद्रीय तत्व है। आज कई राज्य जिला और ब्लॉक स्तर की योजनाओं को एसडीजी लक्ष्यों से जोड़ रहे हैं। एक नया शासन मॉडल उभर रहा है जिसमें मुख्यमंत्री, राज्य योजना निकाय और स्थानीय संस्थान परिणाम-आधारित लक्ष्य तय कर क्षेत्र-विशिष्ट चुनौतियों के समाधान हेतु प्रभावी कार्यान्वयन तंत्र विकसित कर रहे हैं—जो राष्ट्रीय और वैश्विक प्राथमिकताओं से भी सुसंगत है। नीति आयोग के सदस्य अरविंद विरमानी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के दृष्टिकोण पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में प्रत्येक व्यक्ति, संस्था, समाज और राज्य की भूमिका है। नई शिक्षा नीति (एनईपी) के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने गुणवत्तापूर्ण बुनियादी शिक्षा और कौशल विकास की आवश्यकता पर बल दिया, जो आने वाले 10–15 वर्षों के लिए निर्णायक हैं और अन्य कई कारकों से जुड़े हुए हैं। नीति आयोग के कार्यक्रम निदेशक डॉ. प्रवाकर साहू ने कहा कि कीस एक सतत और अनुकरणीय मॉडल का प्रतिनिधित्व करता है। “हमारे अनुकूल जनसांख्यिकीय लाभ विकसित भारत की नींव रखते हैं और कीस इस लक्ष्य में प्रभावी योगदान दे रहा है,” उन्होंने कहा। एसडीजी का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएँ और कौशल विकास है—जिन पर केआईआईटी,कीट और कीस सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। इस अवसर पर सुश्री अभा मिश्रा (यूएनडीपी ओडिशा की राज्य प्रमुख), डॉ. एमडी नदीम नूर (यूएनएफपीए, ओडिशा के कार्यालय प्रमुख), डॉ. सौला कायरियाकोस (फ्रांस स्थित इंटरनेशनल एग्जीक्यूटिव स्कूल की सह-संस्थापक एवं अध्यक्ष), सुश्री अरुषि राय (पूर्व यूएन प्रैक्टिशनर, यूएनएचसीआर) तथा श्री अशोक कुमार परिजा (कुलाधिपति, कीट डीम्ड यूनिवर्सिटी) सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। डॉ. अच्युत सामंत ने अतिथियों का हार्दिक स्वागत किया जबकि प्रो. सरनजीत सिंह, कुलपति, कीट डीम्ड यूनिवर्सिटी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत

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