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शैक्षिक क्रांति के प्रणेता एवं निष्काम लोकसेवा के मसीहाः प्रो.अच्युत सामंत

-अशोक पाण्डेय
ओड़िशा की राजधानी भुवनेश्वर स्थित दो विश्वविख्यात शैक्षिक संस्थाओं कीट-कीस,जो आज कीट-कीस दो डीम्ड विश्वविद्यालय बन चुकी हैं, के संस्थापक तथा आदिवासी बाहुल्य कंधमाल के पूर्व सांसद महान् शिक्षाविद् प्रो.अच्युत सामंत शैक्षिक क्रांति के प्रणेता एवं निष्काम लोकसेवा के मसीहा हैं।वे मानवता के अग्रदूत हैं। कौन बनेगा करोड़पति के अनुसार वे एक निष्काम कर्मयोगी हैं।श्रीमद्भागवत के अनुसार सच्चा और निष्काम कर्मयोगी वह होता है जो समाज से जितना लेता है उससे कहीं अधिक समाज को लौटा देता है।60 वर्षीय प्रो. अच्युत सामंत अबतक अपने जीवनकाल में जो कुछ भी शिक्षा,स्वास्थ्य,खेल,ओड़िया भाषा,साहित्य,कला,संस्कृति,सिनेमा तथा विज्ञान के माध्यम से दे चुके हैं वह न भूतो न ही भविष्यत् है।भारत समेत विश्व के अलग-अलग विश्वविद्यालयों से मानद की कुल 60 डॉक्टरेट की डिग्री उन्हें मिल चुकी है जिससे यह स्पष्ट हो जाता है कि उनकी ख्याति कितनी है।वे हंसमुख,सहृयस,मृदुभाषी,अति सरल और सहज स्वभाव के एक मिलनसार व्यक्ति हैं। उनका जीवन एक खुली किताब है जिसका प्रत्येक पन्ना करुणा,दया,सहयोग,सहानुभूति,प्रेम,आत्मीयता और ऑर्ट ऑफ गिविंग का प्रत्यक्ष संदेश है। उनके मन में आदिवासी बच्चों के लिए,गरीबों और समाज के कमजोर वर्ग के लोगों के सर्वांगीण विकास के लिए अथाह अपनापन है,करुणा है,संवेदना है,समर्पण है और त्याग है। निःस्वार्थ मानव सेवा करने के लिए और उसके लिए हमेशा अवसर ढ़ूढना-उनकी सहज मनोवृत्ति है। वे एक सहृदय व्यक्ति हैं। वे रुके बिना और थके बिना मानवसेवा,समाजसेवा और लोकसेवा करते रहते हैं। उनका जीवन सेवा-भावना का यथार्थ आदर्श है।वे आदिवासी समुदाय के अनाथ , वंचित गरीबों,साधनहीनों और उपेक्षित बच्चों के लिए जीवित मसीहा हैं। वे उनके लिए अपनी ओर से (अपनी विश्वविख्यात संस्था कीस के माध्यम से) निःशुल्क समस्त आवासीय सुविधाओं के साथ-साथ उत्कृष्ट शिक्षा प्रदान करते हैं तथा आदिवासी बच्चों का सर्वांगीण विकास कर उन्हें देश का चरित्रवान,जिम्मेवार,कर्तव्यपरायण तथा ईमानदार नागरिक बनाते हैं। इसीलिए उनकी विश्वविख्यात संस्था कीस आज सच्चरित्र और देशहित के लिए जिम्मेदार मानव निर्माण करनेवाली एकमात्र शैक्षिक संस्था बन चुकी है जहां पर मानव गढ़े जाते हैं। कीस,विश्व का प्रथम और सबसे बड़ा डीम्ड विश्वविद्यालय बन चुका है। कीस भारत का वास्तविक तीर्थस्थल तथा व्यावहारिक रुप से शांतिनिकेतन बन चुका है। लगभग 60 वर्षों का प्रो.अच्युत सामंत का विदेह जीवन सत्य,अहिंसा,त्याग और तपस्या की अमर गाथा है। आदिवासी लोगों,जरुरतमंद लोगों और गरीबों के लिए तो वे दानवीर कर्ण बन चुके हैं।वे सभी के जीवन के सच्चे पथप्रदर्शक हैं। वे निष्काम भाव से नर सेवा को नारायण सेवा मानकर प्रतिदिन 16-16 घण्टे काम करते हैं।वे दीन-हीनों,झुग्गी-झोपड़ी में रहनेवाले गरीब लोगों,निरीह लोगों के साक्षात दिव्य पुरुष थे,आलोकपुरुष हैं।वे एक संवेदनशील व्यक्ति हैं। वे लोगों पर विश्वास करते हैं इसीलिए दूसरों से वे हमेशा विश्वास भी पाते हैं।उनके व्यक्तित्व का एक विलक्षण गुण यह है कि वे संतों के भी संत हैं। उनके समस्त गुण आदर्श महात्माओं के गुण हैं क्योंकि वे सरल,सहज,आत्मीय और सहृदय बनकर गरीबों की भलाई के लिए जो सोचते हैं,वहीं अपने कर्म में भी उतारे हैं।वे तन,मन और धन से प्रतिदिन सेवा करते हैं। उनकी कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं हैं। उनका त्यागी और मनस्वी जीवन आदर्श,अनुकरणीय और वंदनीय है।वे अपने अच्छे कार्यों की छाप दूसरों पर अमिट रुप से छोड़ देते हैं।वे लोगों के दिलों पर राज करते हैं। वे अपनी सेवा-धुन के भी पक्के हैं। अगर कोई उनको कटु शब्द भी कहता है तो उसे वे चुपचाप हंसते-हंसते सह लेते हैं।श्रीमद्भागवत के अनुसार वे आध्यात्मिक जीवन जीते हैं। वे मानवता के आलोकपुरुष हैं।वे हमेशा जगत गुरुओं,संत-महात्माओं,आचार्यों,ब्राह्मणों तथा विद्वानों का आदर करते हैं।उनका यह मानना है कि सच कह देना ही सत्य नहीं है और झूठ कह देना ही झूठ नहीं है । जिससे लोगों का सबसे अधिक हित हो वह वाणी सत्य है और जिस वाणी से सबसे अधिक किसी को दुख और कष्ट पहुंचे वह झूठ है। वे सेवा-समर्पण भाव से जनसेवा, लोकसेवा, मानवसेवा, गुरुसेवा, जगन्नाथ सेवा तथा हनुमान सेवा करते हैं।भारतवर्ष की वर्तमान युवा पीढ़ी और कारपोरेट जगत के भामाशाहों के तो प्रो.अच्युत सामंत आदर्श हैं,रोल मॉडल हैं। सभी उनके पदचिह्नों पर चलने के लिए संकल्प लेते हैं।प्रो.अच्युत सामंत मानवता के अग्रदूत हैं। कौन बनेगा करोड़पति के अनुसार वे सच्चे कर्मवीर हैं।उनकी वाणी-जिह्वा में सरलता है और उनके हृदय में अपार करुणा है जिसके आधार पर उन्होंने कीट-कीस और कीम्स की स्थापनाकर साक्षात करुणासागर बन गये हैं। उनके जीवन का एकमात्र लक्ष्य है-निष्काम सेवा वह भी मानवता के अग्रदूत बनकर। उनका विदेह और त्यागमय जीवन और उनका वास्तविक जीवन दर्शन ओड़िशा के साथ-साथ राममय भारतवर्ष को निश्चित रुप में विकासशील से विकसित बनाने में सहायक सिद्ध होगा।
-अशोक पाण्डेय

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