श्रीमद् भागवत गीता के अनुसार जीव को सबसे अधिक प्रभावित करनेवाली माया है और यह माया कुछ नहीं है बल्कि “मैं” और “तुम”की भावना है। इसलिए इन दोनों का प्रयोग करते समय अपने और तुम्हारे की ग़लत भावना, विचार और व्यावहारिक आचरण से सभी को बचना होगा।
कौरवों और पांडवों में ये दोनों दोष कमोबेश विद्यमान थे। शांतिदूत श्रीकृष्ण ने अर्जुन को बार-बार इस माया से बचने का उपदेश दिया था।
आजका आपका दिन बहुत ही सुंदर होगा।
-अशोक पाण्डेय









