भूवनेश्वर, 7.7: हर साल की तरह इस साल भी कीस श्रीवाणीक्षेत्र जगन्नाथ मंदिर प्रशासन की ओर अनुष्ठित हुई श्री जगन्नाथ महाप्रभु की विश्व प्रसिद्ध घोषयात्रा । सुबह मंगल आरती, मैलम, तड़पलागी, रोश होम, अबकाशा, सूर्य पूजा और रथ स्थापना जैसे अनुष्ठानों के बाद 4:00 बजे छेरापहंरा नीति कीस जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट के संस्थापक अच्युत सामंत जी के द्वारा पूरी की गई। शाम 4:30 बजे, भक्तों ने भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और महाप्रभु जगन्नाथ के रथ को नवनिर्मित गुंडिचा मंदिर तक खींचा। घंटियों, मृदंगों और ढोल की थाप के साथ ही जय जगन्नाथ के नाद से रथदाण्ड गुंजायमान हो गया। श्रीवाणी क्षेत्र रथ यात्रा का एक मुख्य आकर्षण यह रहा कि यहां देवी सुभद्रा के रथ को महिलाओं ने खींचा। मौसम अनुकूल था इसलिए घोषयात्रा देखने के लिए स्थानीय क्षेत्र से 30,000 से अधिक श्रद्धालु एकत्र हुए। सुसज्जित नंदीघोष, तालध्वज और देवदलन रथों को खींचकर भक्तों ने देवी का आशीर्वाद प्राप्त किया। गौरतलब है कि पुरी जगन्नाथ मंदिर की परंपरा के आधार पर श्रीवाणी क्षेत्र भगवान महाप्रभु के सभी सिद्धांतों के अनुसार पूजा की जाती है। पुरी रथ यात्रा के सभी नियम भी यहां रथयात्रा में पालन किया जाता है। रथ बनाने के लिए पुरी से विशेष बिंदानी, महाराणा और चित्रकारों को काम पर रखा जाता है। श्रीवाणी क्षेत्र में श्रीजगन्नाथ मंदिर के निर्माण से लेकर, पुरी के राजा गजपति श्री दिव्यसिंहदेव की सलाह के अनुसार यहां सभी पूजा किया जाता हैं। यहां भी मंदिर की अबिकाला संरचना में भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के लिए 16, 14 और 12 पहियों वाले तीन रथ बनाए गए हैं। रथयात्रा से लेकर बाहुड़ा नौ दिनों तक यह महाप्रभु के समक्ष भजन समारोह आयोजित किया जाएगा। हर साल इन नौ दिनों में श्रीजीउ के दर्शन के लिए आसपास के क्षेत्रों से भक्तों का तांता लगा रहता है।
श्रीवाणी क्षेत्र जगन्नाथ मंदिर की ओर से अनुष्ठित हुई भगवान जगन्नाथ की घोषयात्रा
