



प्रस्तुतिः अशोक पाण्डेय
भुवनेश्वर(ओडिशा) स्थित विश्व के दो विश्व विख्यात डीम्ड विश्वविद्यालयों,कीट-कीस के संस्थापक तथा कंधमाल लोकसभा सांसद सच्चे मानवतावादी प्रोफेसर अच्युत सामंत का आध्यात्मिक जीवन उनको संतों की पहली पंक्ति में प्रतिष्ठित कर चुका है। 57वर्षीय प्रोफेसर अच्युत सामंत यह मानते हैं कि उनके बाल्यकाल की उनके आध्यात्मिक जीवन की प्रेरणा उनकी स्वर्गींया मां नीलिमारानी सामंत रहीं। उनके द्वारा प्रोफेसर सामंत को प्रदान सकारात्मक सोच,सदाचारी-परोपकारी सरल जीवन,सत्यनिष्ठा,आत्मविश्वास,अति सरल व्यवहार, गुरु,ईश्वर,देवता, ब्राह्मण,दरिद्रनारायण सेवा आदि उनको एक असाधारण कामयाब इन्सान बना दिया है। होनहार वीरवान के होत चिकनो पात-वाली बात पूरी तरह से प्रोफेसर अच्युत सामंत के जीवन के साथ लागू है। उन्होंने अपनी कुल जमा पूंजी मात्र पांच हजार रुपये से भुवनेश्वर के दो किराये के मकान में 1992-93 में कीट-कीस की स्थापना मात्र 125 छात्रों से की । आज कीट-कीस दो डीम्ड विश्वविद्यालय बन चुके हैं। प्रतिवर्ष हजारों युवा कीट डीम्ड विश्वविद्यालय से उच्च तथा तकनीकी शिक्षा प्राप्तकर स्नातक बनते हैं। पीजी की डिग्री लेते हैं। डाक्टरेट करते हैं। स्वावलंबी बनते हैं। प्रोफेसर अच्युत सामंत का कीट डीम्ड विश्वविद्यालय अगर कारपोरेट है तो कीस डीम्ड विश्व विद्यालय ,विश्व का प्रथम आदिवासी आवासीय डीम्ड विश्वविद्यालय कीट कारपोरेट का वास्तविक सामाजिक दायित्व है। एक अनौपचारिक बातचीत में प्रोफेसर अच्युत सामंत ने बताया कि जब वे मात्र चार साल के थे तभी उनके पिताजी का एक रेल दुर्घटना में असामयिक निधन हो गया। उनकी विधवा मां स्व.नीलिमा रानी सामंत ने उनको मात्र चार साल की उम्र से ही उनको घोर आर्थिक संकटों में अनुशासन तथा धीरज के साथ जीना सिखाया। ईश्वरभक्ति,पूजा-पाठ तथा आध्यात्मिक जीवन जीना सिखाया। इसीलिए तो आज भारत के अन्यतम धाम श्री जगन्नाथ पुरी के गोवर्द्धन पीठ के 145वें पीठाधीश्वर जगतगुरु शंराचार्य परमपाद स्वामी निश्चलानन्द सरस्वती महाभाग उनके गुरु हैं। पुरी के भगवान जगन्नाथ के प्रथम सेवक गजपति महाराजा श्री श्री दिव्यसिंहदेवजी उनके आध्यात्मिक जीवन के सच्चे मार्गदर्शक हैं। सभी धर्मों के सद्गगुरुओं के आध्यात्मिक विचार प्रोफेसर सामंत को पसंद हैं। सबसे बडी बात तो यह है कि इस 10अक्तूबर,2021 को जब श्री भारतीय संस्कृति सम्वर्द्धक ट्रस्ट,संदीपनि विद्यानिकेतन,पोरबन्दर,गुजरात ने अपने अनोखे कार्यक्रम- सर्वीस टू सोसायटी कार्यक्रम में –विश्व विख्यात रामायणी परम संत परमपाद भाईश्री रमेशभाईजी ओझा के कर-कमलों द्वारा प्रोफेसर अच्युत सामंत को उनके सर्वीस टू सोसायटी के रुप में 1992-93 में कीस की स्थापना करने,उसे मानवता की रक्षा के लिए विश्व के आकर्षण का केन्द्र बनाने तथा कीस की उत्कृष्ट शिक्षा के माध्यम से पिछले लगभग 27-28 वर्षों से लाखों आदिवासी अनाथ बच्चों को स्वावलंबी,ईमानदार,जिम्मेवार,चरित्रवान,कुशल, सच्चे देशभक्त तथा निःस्वार्थी समाजसेवी बनाने,सच्चे मानव गढने के लिए प्रोफेसर अच्युत सामंत को महर्षि सम्मान से सम्मानित किया। प्रोफेसर अच्युत सामंत तभी से और अधिक ऊर्जायमान हो चुके हैं। गौरतलब है कि प्रोफेसर सामंत ने अबतक कुल 25 से भी अधिक मंदिरों का निर्माण किया है। पिछले लगभग 30 वर्षों से वे प्रतिमाह की संक्रांति के दिन श्रीरामचरितमानस के सुंदर काण्ड का संगीतमय अखण्ड पाठ कराते हैं। प्रतिमाह की पहली तारीख को पुरी जाकर भगवान जगन्नाथ के दर्शन करते हैं। प्रति माह के अंतिम शनिवार को सिरुली जाकर हनुमानजी के दर्शन करते हैं। समय-साय पर नवग्रह पूजन कराते हैं। सर्वधर्मसभा आयोजित कराते हैं। संतों-महात्माओं के दर्शन करते हैं। उनके सानिध्य का आध्यात्मिक लाभ उठाते हैं। तिरुपति जाकर केश-मुण्डन कराते हैं। उनके द्वारा स्थापित कीट-कीस द्वय डीम्ड विश्वविद्यालयों में प्रतिवर्ष हर्षोल्लास के साथ रथयात्रा, होली,दीवाली,दशहरा,ईद,पोंगल,लोहडी,क्रिसमस और छठ आदि मनाया जाता है। आध्यात्मिक पुरुष प्रोफेसर अच्युत सामंत ने वैश्विक महामारी कोरोनाकाल में लगभग एकसाल आठ महीने तक 4-4 कोविड-19 अस्पातल खोलकर,उन अस्पतालों में अपने मेडिकल कालेज कीम्स की ओर से दक्ष डाक्टर,नर्स,पारामेडिकल स्टाफ आदि की तैनाती कर जिस प्रकार का अभूतपूर्व मानवता की सेवा का कार्य किया है उसके लिए अखिल भारतीय स्तर पर एकमात्र निजी अस्पताल के रुप में कीम्स को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत किया गया है। प्रोफेसर अच्युत सामंत के अनुसार – “मानव-सेवा ही माधव सेवा है।“ उसीको आधार मानकर वे आध्यात्मिक जीवनयापन करते हैं और आजीवन सच्चे मानवतावादी बनकर निःस्वार्थ मानवसेवा में अपने आपको लगाये रखेंगे।
अशोक पाण्डेय










