सच का सीधा संबंध व्यक्ति विशेष से होता है और यह प्रत्येक काल और परिस्थितिय में सच ही होता है।आजकल बड़ी ही तीव्र वेग से झूठ की संस्कृति पल्लवित और पुष्पित हो रही है। एक तरफ सनातनधर्मी भारतवर्ष के सभी युगों (कलियुग को छोड़कर) सत्य का साम्राज्य रहा है। इसलिए आज भारतवर्ष के लिए यह सबसे बड़ी चिंता का विषय है। मान्यवर,सच ही हमारी भारतीयता की वास्तविक पहचान है।
एक सत्यवादी राजा था। उसने अपने राज्य में यह घोषणा कर दी कि जो भी झूठ बोलेगा उसको राज्य से निकाल दिया जाएगा और उसे जंगल में तबतक अज्ञात वास करना होगा जबतक उसका हृदय परिवर्तन न हो जाय। राजा की घोषणा सुनकर एक किसान राजा के पास आया और राजा को यह बताया कि कभी अतिवृष्टि से तो कभी अनावृष्टि से उसकी फसल नष्ट हो जाती है लेकिन वह यह हिम्मत नहीं जुटा पाया कि इस सच की जानकारी वह अपने राजा को दे। राजा ने उस किसान की बात सुनी फिर भी उसे जंगल में एकांत वास के लिए भेज दिया। किसान एकांत वास करने लगा। एक दिन वह देखता क्या है कि उसके राज्य का राजा भी उसी के समीप एकांत वास कर इंद्रदेव से प्रार्थना कर रहा था कि वे उसके राज्य पर कृपा करें और समयानुकूल वर्षा करें। भगवान इन्द्रदेव प्रगट हुए और राजा से कहा कि वे उनके राज्य के उस एकांत वास कर रहे किसान और उस किसान का कल्याण चाहने वाले राजा से अति प्रसन्न हैं और यह वरदान देते हैं कि केवल उस राजा के राज्य में नहीं अपितु सम्पूर्ण धरती पर कभी भी अतिवृष्टि या अनावृष्टि नहीं करेंगे जहां पर सच का साम्राज्य होगा।
-अशोक पाण्डेय








