
-अशोक पाण्डेय
यह कहना कोई अतिशयोक्ति की बात नहीं होगी कि भगवान शिव ने सम्पूर्ण भारत को जोड़ा है।मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने भारत को उत्तर से दक्षिण तक जोड़ा है और भगवान श्रीकृष्ण ने भारतवर्ष को पूर्व से पश्चिम तक जोड़ा है।तीनों का विलक्षण व्यक्तित्व नित्य प्रातः स्मरणीय,दर्शनीय,वंदनीय और अनुकरणीय व्यक्तित्व हैं। जहां तक मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीरामचन्द्रजी के दिव्य नाम की बात है, इसका शाब्दिक अर्थ है-जिसमें सभी रम जाएं वह राम है।श्रीराम ने सभी को आजीवन प्रेम दिया इसीलिए सभी से उनको प्रेम मिला।श्रीराम समस्त चराचर जगत के कल्याण के मानक हैं जिनकी प्रासंगिकता आज भी है। श्रीरामचन्द्रजी का सम्पूर्ण जीवन ही एक महाकाव्य है जिसका अपने-अपने ढंग से वर्णन कर कोई भी महाकवि और कवि बन सकता है। श्रीरामचन्द्रजी के जीवन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे करुणासागर हैं,दयासागर हैं और कृपानिधान हैं।इस सृष्टि का मूल आधार ही करुणा है। श्रीरामचन्द्रजी का बाल्यकाल गुरुकुल में शिक्षाप्राप्ति में व्यतीत होता है और वे जब पन्द्रह साल के हुए तो विश्वामित्र मुनिजी उनको अपने साथ ले गये जहां पर उन्होंने दुराचारी राक्षसों से ऋषि-मुनियों की रक्षा किए। प्रारब्ध के अनुसार जब श्रीराम चन्द्रजी 25 वर्ष के हो गये तो उनका विवाह धनुषयज्ञ के साथ जनकनंदिनी सीता से हुआ।वाल्मीकि जी ने श्रीराम चन्द्रजी के कुल 16 गुणों को बताया जिसे आज भी समस्त भारत के युवाओं को अपनाना चाहिए। हमें श्रीरामचन्द्रजी की तरह ही धर्मज्ञ बनना चाहिए।धर्मनिष्ठ बनना चाहिए। उन्हीं की तरह शीलवान व चरित्रवान बनना चाहिए।मातृ-पितृभक्त आज्ञाकारी पुत्र बनना चाहिए। उन्हीं की तरह मानवीय मूल्यों के यथार्थ आदर्श बनना चाहिए। हमें श्रीरामचन्द्रजी की तरह ही अपराजेय योद्धा तथा आदर्श राजनेता बनना चाहिए। महाकवि कालिदास जी ने श्रीरामचन्द्रजी को तपस्वी और तेजस्वी राम के रुप में वर्णितकर आज के भारतीय युवाओं को तपस्वी और तेजस्वी बनने का संदेश दिया है। गोस्वामी तुलसीदास ने अपने महाकाव्य श्रीरामचरितमानस को समन्वय की एक विराट चेष्टा के रुप में वर्णितकर मर्यादापुरुषोत्तम श्रीराम की तरह ही आज के युवाओं को व्यावहारिक जीवन जीने का पावन संदेश दिया है।
सच कहा जाय तो मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीरामचन्द्रजी भारतीय सांस्कृतिक अस्मिता के प्रतीक हैं। श्रीराम लोकनायक हैं। वे लोकजीवन की धरोहर हैं। संत कबीरदास के अनुसार श्रीरामचन्द्रजी के नाम का स्मरण ही बात करते हैं जिससे मानवजीवन सार्थक हो जाता है। गोस्वामी तुलसीदासजी ने श्रीरामचन्द्रजी के जीवन को भारतीय संस्कृति के भावपुरुष के रुप में वर्णित किया है जो आज भी भारतीय अस्मिता की पहचान हैं।
कुल मिलाकर, श्रीरामचन्द्रजी का सम्पूर्ण जीवन तेजस्वी और तपस्वी राजा के रुप में हमें आज भी त्याग,प्रेम,करुणा,अनुशासन और पूर्णरुपसे व्यावहारिक सहयोग देता है।
-अशोक पाण्डेय








