-अशोक पाण्डेय
वैशाख मास के शुक्लपक्ष की तृतीया को अक्षयतृतीया कहते हैं।2026 की अक्षयतृतीया 19 अप्रैल को है। अक्षयतृतीया को युगादितृतीया भी कहा जाता है। अक्षयतृतीया के पवित्रतम दिवस से ही सत्युग और त्रेतायुग का आरंभ हुआ था। भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को स्वयं अक्षयतृतीया के महत्त्व को बताया था।अक्षयतृतीया के दिन ही द्वारकाधीश श्रीकृष्ण से मिलने के लिए उनके बाल सखा सुदामा द्वारकापुरी गये थे। भगवान जगन्नाथ के अन्यतम धाम श्रीजगन्नाथ पुरी धाम में भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा के लिए नये रथों के निर्माण का कार्य आरंभ होता है। उसी दिन से जगन्नाथ भगवान की विजय प्रतिमा मदनमोहन आदि की 21 दिवसीय बाहरी चंदनयात्रा पुरी धाम के चंदन तालाब में नौकाविहार के रुप में अनुष्ठित होती है।अक्षयतृतीया के दिन से ही ओड़िशा के किसान अपने-अपने खेतों में जुताई-बोआई का कार्य आरंभ करते हैं।स्कन्द पुराण के वैष्णव खण्ड के वैशाख महात्म्य में यह स्पष्ट उल्लेख है कि जो वैष्णव भक्त अक्षयतृतीया के दिन सूर्योदयकाल में प्रातः पवित्र स्नान कर भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करता है।उनकी कथा सुनता है वह मोक्ष को प्राप्त होता है। ओड़िशा में प्रत्येक सनातनी भगवान जगन्नाथ को अपना इष्टदेव,गृहदेव, ग्राम्यदेव तथा राज्यदेव मानकर अक्षयतृतीया आस्था और विश्वास के साथ मनाता है।इसीलिए ओड़िशा में अक्षयतृतीया का पालन व्यक्तिगत,पारिवारिक,सामाजिक और धार्मिक रुप से स्पष्ट नजर आता है। अक्षयतृतीया के दिन पुरी में श्रीजगन्नाथ भगवान को चने की दाल का भोग निवेदित किया जाता है। सनातनी लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की चिर शांति हेतु अक्षयतृतीया के दिन फल-फूल आदि का दान करते हैं।जो भक्त अक्षय तृतीया के दिन सायंकाल भगवान जगन्नाथ को शर्बत निवेदित करता है वह अपने सभी पापों से शीघ्र मुक्त हो जाता है।अक्षय तृतीया के दिन भगवान श्री जगन्नाथ-कथा श्रवण एवं दान- पुण्य का अति विशिष्ट महत्त्व माना जाता है।कहते हैं कि अक्षय तृतीया के दिन जो भक्त भगवान जगन्नाथ की पूजा करता है वह अपने पूरे कुल का उद्धारकर बैकुण्ठ लोक को प्राप्त होता है। प्रतिवर्ष अक्षयतृतीया समस्त सनातनियों को नकारात्मक सोच से बचने,क्रोध न करने,चोरी न करने,किसी का अपमान न करने,निंदारस से बचने तथा अनेकानेक लगत आचरण-व्यवहार से बचने का पावन संदेश देती है।कहा जाता है कि ऐसे दुष्कर्म करनेवाले पर उस दिन धन की देवी माता लक्ष्मी जी नाराज हो जाती हैं।इसप्रकार भगवान जगन्नाथ तथा माता लक्ष्मी को प्रसन्न करनेवाला पवित्रतम व्रत अक्षयतृतीया ही है।
अशोक पाण्डेय








