श्रीरामचरितमानस के अनुसार: भरतलाल जैसा दिव्य मस्तक और माता सीता जैसा पवित्र पांव दुनिया में किसी का नहीं है।जब भरतलाल माता सीता के पांव का स्पर्श करते थे तो देवगण भी देखकर धन्य हो जाते थे।आप भी अपने जीवन में बड़े -बुजुर्गो के चरणस्पर्श के संस्कार को अवश्य विकसित करें!
-अशोक पाण्डेय








