भुवनेश्वर: प्रख्यात शिक्षाविद्, समाजसेवी तथा कीट एवं कीस के संस्थापक डॉ. अच्युत सामंत को नई दिल्ली में आयोजित आईएफआईपी वर्ल्ड इन्क्लूजन कॉन्फ्रेंस (WIC) इंडिया–2026 में प्रतिष्ठित ‘ग्लोबल विज़नरी अवॉर्ड फॉर इन्क्लूसिव एजुकेशन’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें शुक्रवार को इंटरनेशनल फोरम्स ऑफ इन्क्लूजन प्रैक्टिशनर्स (IFIP), यूनाइटेड किंगडम तथा दक्षिण एशिया क्षेत्र के लिए उसके रणनीतिक साझेदार AFAIRS द्वारा प्रदान किया गया। आईएफआईपी (यूके) द्वारा आयोजित दो दिवसीय वर्ल्ड इन्क्लूजन कॉन्फ्रेंस इंडिया–2026 का आयोजन 31 जुलाई से 1 अगस्त 2026 तक नई दिल्ली में हुआ। यह पहली बार था जब इस वैश्विक समावेशन सम्मेलन का आयोजन भारत में किया गया। आईएफआईपी (यूके) द्वारा स्थापित नेशनल इन्क्लूजन अवॉर्ड्स उन वैश्विक एवं राष्ट्रीय नेताओं को प्रदान किए जाते हैं, जिन्होंने शिक्षा, समाज, सार्वजनिक नीति, नवाचार, सुगम्यता (Accessibility) और मानव विकास के क्षेत्र में समावेशिता को बढ़ावा देने में उल्लेखनीय योगदान दिया है। डॉ. अच्युत सामंत को ‘ग्लोबल विज़नरी अवॉर्ड फॉर इन्क्लूसिव एजुकेशन’ उनके समावेशी शिक्षा, जनजातीय सशक्तिकरण, सामाजिक नवाचार और राष्ट्र निर्माण में असाधारण एवं परिवर्तनकारी योगदान के लिए प्रदान किया गया। सम्मान-पत्र में उल्लेख किया गया कि डॉ. सामंत के दूरदर्शी नेतृत्व में स्थापित कीट और कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज़ (कीस) ने समावेशी एवं समग्र शिक्षा का विश्व के सबसे प्रेरणादायक मॉडलों में से एक विकसित किया है। जनजातीय एवं वंचित समुदायों के हजारों बच्चों को निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, पोषण, आजीविका के अवसर और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराकर उन्होंने यह सिद्ध किया है कि शिक्षा सामाजिक समानता, सशक्तिकरण और सतत सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम बन सकती है। सम्मान प्राप्त करने के बाद डॉ. सामंत ने कहा, “आईएफआईपी (यूके) ने मेरे उस कार्य को मान्यता दी है, जो विश्व समावेशन सम्मेलन के मूल्यों—समानता, सुगम्यता, अवसर और प्रत्येक शिक्षार्थी के लिए अपनत्व—को साकार करता है।” उन्होंने कहा कि यह सम्मान कीट और कीस के माध्यम से समावेशी शिक्षा, जनजातीय सशक्तिकरण और सामाजिक परिवर्तन की पूरी यात्रा का सम्मान है। इंटरनेशनल फोरम्स ऑफ इन्क्लूजन प्रैक्टिशनर्स (IFIP), यूनाइटेड किंगडम समावेशन, सुगम्यता, समान अवसर और सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देने वाला विश्व के अग्रणी वैश्विक संगठनों में से एक है। 143 देशों में अपनी उपस्थिति और 18,000 से अधिक समावेशन विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं और नेतृत्वकर्ताओं के वैश्विक नेटवर्क के साथ यह संस्था अंतरराष्ट्रीय सहयोग और व्यापक सामाजिक परिवर्तन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
सफल समावेशी शिक्षा के लिए डॉ. अच्युत सामंत को मिला ‘ग्लोबल विज़नरी अवॉर्ड’











