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नीलाद्रि विजय तक घर-घर में होती है भगवान जगन्नाथ की विशेष पूजा-अर्चना

भुवनेश्वरः19जुलाईःअशोक पाण्डेयः
प्रतिवर्ष रथयात्रा से लेकर नीलाद्रि विजय तक ओडिशा के घर-घर में भगवान जगन्नाथ की विशेष पूजा-अर्चना होती है। अनन्य जगन्नाथभक्त श्री सौभाग्य महापात्र के अनुसार भगवान जगन्नाथ ओडिया जाति के जन-जन के प्राण हैं जिनकी पूजा प्रत्येक ओडिया चौबीसों घण्टे करता है। जगन्नाजी ओडिशा के इष्टदेवता,गृहदेवता,कुलदेवता,ग्रामदेवता और राज्यदेवता के रुप में पूजे जाते हैं इसीलिए साल में एकबार बडे आकार में आयोजित होनेवाली जगन्नाथजी विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा प्रत्येक ओडिया के आत्मगौरव की प्रतीक होती है जिसे भारत समेत पूरा विश्व जानता है। सच कहा जाय तो ओडिशा में साल के 12 महीनों में जगन्नाथजी के 13 पर्व श्रीमंदिर में ही मनाये जाते हैं। ऐसे में सिर्फ उनके पूजा-पाठ तथा विशेष रुप से अर्चना की बात नई नहीं है अपितु उनके प्रति समस्त ओडिया समुदाय के अन्तःकरण की आत्मीयता की बात है। इसीलिए यहां पर यह सत्य सिद्ध होते देखा जाता है- यथाशक्ति तथा जगन्नाथजी की भक्ति। पिछले लगभग दो सालों से ओडिशा के लोग कोरोना से संक्रमित जरुर हैं लेकिन जगन्नाथ के प्रति उनकी आस्था और विश्वास में कहीं भी कोई कमी नहीं नजर आई है। ओडिशा समेत पूरे विश्व में नित्य नये-नये जगन्नाथ मंदिर बन रहे हैं।उन मंदिरों में पुरी धाम के श्रीमंदिर की तरह नित्य पूजा-पाठ हो रहा है। उन मंदिरों में रथयात्रा अनुष्ठित हो रही है। यह भी ज्ञातव्य हो कि ओडिशा में कुल लगभग 1614 जगन्नाथ मंदिर हैं। पूरे भारत में कुल लगभग 2768 जगन्नाथ मंदिर हैं और विदेशों में कुल लगभग 265 जगन्नाथ मंदिर हैं। सच तो यह भी है कि केवल अमरीका में ही कुल लगभग 56 जगन्नाथ मंदिर हैं जो जगन्नाथ भक्तों के आस्था,भक्ति तथा विश्वास के प्रतीक स्वरुप हैं। विश्व चेतना के प्राण भगवान जगन्नाथ ओडिशा के प्रत्येक भक्त के हृदय में निवास करते हैं। इसीलिए प्रतिवर्ष रथयात्रा से लेकर नीलाद्रि विजय तक प्रत्येक घर में भगवान जगन्नाथ की विशेष पूजा-अर्चना होती है। विष्णु सहस्त्रनाम का नित्य जाप होता है। जगन्नाथ नाम संकीर्तन होता है। स्कन्द पुराण में वर्णित उत्कल खण्ड के जगन्नाथ महात्म्य पर आधारित भक्तिमय संगोष्ठी होती है। पुरी के सभी मठों में जगन्नाथ महात्म्य की कथा होती है। पुरी गोवर्द्धन पीठ में 145वें पीठाधीश्वर परमपाद स्वामी निश्चलानन्दजी सरस्वती महाराजश्री का प्रतिदिन जगन्नाथ महात्म्य पर प्रवचन होता है। कोरोना संक्रमण के बावजूद भी पुरी से सभी मठों में जगन्नाथजी की नित्य पूजा-अर्चना होती है। सिरुली हनुमान मंदिर में जिसका विशेष महत्त्व पौराणिक काल से पुरी जगन्नाथ मंदिर से है,वहां भी प्रतिदिन जगन्नाथजी और उनके भक्त हनुमानजी की पूजा होती है। संकीर्तन होता है। गुण्डीचा मंदिर में लगातार सात दिनों तक गुण्डीचा महोत्सव होता है। यह सिद्ध करता है कि प्रत्येक जगन्नाथ भक्त अपने जीवन के अनुकूल तथा प्रतिकूल परिस्थिति में भी प्रतिवर्ष रथयात्रा से लेकर नीलाद्रि विजय तक घर-घर में भगवान जगन्नाथ की विशेष पूजा-अर्चना कर आत्मगौरव की अनुभूति करता है।
अशोक पाण्डेय

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