

भुवनेश्वरः21अगस्तःअशोक पाण्डेयः
21अगस्त को कीट-कीस के प्राणप्रतिष्ठाता तथा कंधमाल लोकसभा सांसद प्रोफेसर अच्युत सामंत ने अपनी मां स्वर्गीया नीलिमारानी सामंत की 93वीं जयंती अकेले ही भुवनेश्वर अपने नयापली निवास स्थल पर मनाई। सुबह में सबसे पहले उन्होंने जरुरतमंद लोगों को सूखा भोजन दान में दिया। उसके उपरांत वे अपने हाथों से अपनी मां स्वर्गीया नीलिमारानी सामंत की पसंद का भोजन तैयार किया और अपने निवास स्थल के उत्तरी दिशा में पूरे सनातनी विधि-विधान के साथ कौवों को खिलाया। अवसर पर श्रद्धापूर्वक ब्राह्मण भोज कराया तथा ब्राह्मणों को यथोचित दान देकर विदा किया। गौरतलब है कि प्रोफेसर अच्युत सामंत अपने स्मार्ट विलेज कलराबंक जाकर अपनी स्वर्गीया मां नीलिमारानी सामंत की प्रस्तर की बडी मूर्ति पर फूल मालाएं चढाई और ब्राह्मणों को वहां पर भी भोजन कराया। अपनी प्रतिक्रिया में प्रोफेसर अच्युत सामंत ने बताया कि उनके कामयाब जीवन की पहली गुरु उनकी मां रहीं जिसने उन्हें घोर आर्थिक संकटों में धीरज.अनुशासन,सत्यनिष्ठा,आत्मविश्वास तथा स्वविवेक के साथ जीवन जीना सिखाया। संकट की घडी में भी प्रोफेसर सामंत की सोच को सकारात्मक मनाया। उन्हें स्वावलंबी बनाया। परोपकारी बनाया।निःस्वार्थ समाजसेवी बनाया।आध्यात्मिक जीवन जीना सिखाया। ईश्वर,सत्गुरु तथा दरिद्रनारायण सेवा का ऐसा मंत्र दिया जिसे वे आजीवन अपनाये रखेंगे। प्रोफेसर सामंत ने यह भी बताया कि कोरोना संक्रमण काल में भी वे अपने व्यक्तिगत दायित्व,सामाजिक दायित्व,लोककल्याण कार्य करना तथा दरिद्रनारायण सेवाकरना कभी नहीं भूले। उन्होंने बताया कि यह सबकुछ वे अपनी स्वर्गीया मां नीलिमारानी सामंत के दिव्य आशीष से ही कर पा रहे हैं। आज के दिन उन्होंने सभी से एक ही निवेदन किया कि सभी अपनी-अपनी मां का आदर करें। मां का सम्मान करें।मां की कही गई अच्छी बातों को अपने जीवन में उतारें तथा प्रोफेसर सामंत की तरह ही जीवन में कामयाब बनने के लिए अपनी-अपनी मां का आशीष अवश्य लें।
अशोक पाण्डेय









