Header Ad

Categories

  • No categories

Most Viewed

जैन तेरापथं समाज में महान पावन पर्व संवत्सरी तथा क्षमायाचना पर्व मनाया गया।

जैन जगत में पर्युषण पर्व का विशेष महत्व है। 8 दिन तक तप, आराधना तथा त्याग, तपस्या के द्वारा मनाया जाता है। पर्युषण पर्व की समाप्ति को क्षमायाचना पर्व के रूप में मनाया जाता है। पुरे विश्व मे एक मात्र जैन धर्म है जिसमे क्षमायाचना का पर्व मनाया जाता है ।

मुनिश्री डॉ ज्ञानेन्द्र कुमार जी मुनि डॉ बिमलेश कुमार तथा मुनि पदम कुमार जी जी का चातुर्मासिक प्रवास तेरापथं भवन भुवनेश्वर में है । मुनिश्री के सानिध्य में तेरापथं भवन में दैनिक प्रवचन, ज्ञान, ध्यान साधना आदि का क्रम निरंतर चल रहा है।

जैन तेरापथं समाज द्वारा मुनिश्री डॉ ज्ञानेन्द्र कुमार जी ठाणा 3 के सानिध्य में जैन जगत के महान पर्व का पालन किया। 8 दिन तक प्रातः 5-30 बजे से रात्री 9-30 बजे तक विभिन्न प्रकार के अनुष्ठान, जप, तप, तपस्या तथा दैनिक प्रवचन आदि से पर्व मनाया गया।

क्षमायाचना के दिन तपस्वी भाई बहनों का जैन संस्कार विधि से पारणा करवाया गया। सभी ने 8 दिन तक निरआहार (खाये बिना) तथा सुर्यास्त के बाद जल भी नहीं भी नहीं लिया। जैन जगत में तपस्या का बहुत महत्व है। मुनिश्री की प्रेरणा से भुवनेश्वर में अच्छी तपस्या हो रही है। संवत्सरी महापर्व पर लग सम्पूर्ण समाज ने उपवास रखा था। लगभग 7 घंटे मुनिश्री ने प्रवचन दिया। प्रवचन के दौरान तपस्वी भाई बहनों का तप अभिनंदन किया गया। श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी महासभा के अध्यक्ष, तेरापथं सभा भुवनेश्वर के अध्यक्ष, मंत्री तथा महिला मंडल, तेरापथं युवक परिषद, भवन समिति तथा ज्ञानशाला व सभी संस्थाओं के पदाधिकारियों ने तपस्वीयों का अभिनन्दन किया तथा जीव जगत के प्राणी मात्र से जाने अनजाने मे हुई भूलों के लिए क्षमायाचना की। महातपवसी युगप्रधान् आचार्य श्री महाश्रमण जी तथा सभी साधु, साध्वीयों एंव तेरापथं भवन में विराजित मुनिश्री डॉ ज्ञानेन्द्र कुमार जी ठाणा 3 से सम्पूर्ण समाज ने करबद्ध क्षमायाचना की। बहुत अच्छी संख्या में सम्पूर्ण समाज ने इस महान पर्व का लाभ लिया।
श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा भुवनेश्वर

    Leave Your Comment

    Your email address will not be published.*

    Forgot Password