

भुवनेश्वरः25 सितंबरःअशोक पाण्डेयः
प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी कीट अभिव्यक्ति,ख्वाहिशें (कीट हिन्दी सोसायटी) ने ओड़िया-हिन्दी को एकमंच पर लाकर आत्नीय भाव से मनाया हिन्दी दिवस।समारोह के मुख्य अतिथि थे नीट जमशेदपुर,झारखण्ड के अवकाशप्राप्त प्रोफेसर डॉ.रनजीत प्रसाद,सम्प्रतिःमेम्बर, पर्यावरण,वन और जलवायु परिवरर्तन मंत्रालय,भारत सरकार की पर्यावरण मूल्यांकन समिति(उद्योग-1) तथा सम्मानित अतिथि थे राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त अशोक पाण्डेय।कार्यक्रम का शुभारंभ परम्परागत दीप प्रज्ज्वलन से हुआ।स्वागत भाषण दिया प्रोफेसर डॉ. देवाशीष बंदोपध्याय,प्रो-वीसी कीट डीम्ड विश्वविद्यालय।प्रोफेसर बंदोपध्याय ने हिन्दी के चारों कालों क्रमशःवीरगाथा काल,भक्तिकाल,रीतिकाल तथा आधुनिक काल की जानकारी देते हुए भारत की सभी 22 राजभाषाओं तथा संघ की राजभाषा हिन्दी का समान रूप से आदर करते हुए उसे स्वेच्छापूर्वक अपनाने की सिफारिश की।वहीं प्रोफेसर डॉ. रनजीत प्रसाद ने बताया कि जिन परिस्थितियों में भारत के संविधान का निर्माण हुआ उन परिस्थितियों में हिन्दी भाषी साहित्यकारों से कहीं अधिक समर्थन हिन्दीत्तेर राज्यों के विद्वानों ने हिन्दी को राष्ट्रभाषा के रुप में अपनाने का समर्थन किया।इसीलिए सबसे पहले महात्मा गांधी ने 1918 में हिन्दी की लोकप्रियता को ध्यान में रखकर इसे भारत की राष्ट्रभाषा बनाने की सिफारिश की थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज आवश्यकता भारत के सभी प्रदेशों में अपनी मातृभाषा के माध्यम से ही उच्च शिक्षा अर्जन की है जिसे धीरे-धीरे अपनाया जा रहा है जो एक सुखद पहल है। राष्ट्रपति पुरस्कारप्राप्त अशोक पाण्डेय ने बताया कि कीट-कीस और कीम्स के संस्थापक तथा भारतीय राज्यसभा के पूर्व सांसद तथा कंधमाल लोकसभा के पूर्व सांसद प्रोफेसर अच्युत सामंत ने सन् 2000 से ही कीट में हिन्दी सोसायटी गठितकर स्थानीय ओड़िया स्कूलों के शिक्षकों तथा बच्चों को हिन्दी से जोड़ने का सफल प्रयास किये हैं जिसका परिणाम यह है कि प्रतिवर्ष कीट अभिव्यक्ति के युवा स्थानीय ओड़िया स्कूलों में जा-जाकर हिन्दी कौशल विकास को विकसित करने से संबंधित अनेकानेक प्रतियोगिताएं आयोजित करते हैं और विजेताओं को हर साल पुरस्कृत किया जाता है।उन्होंने बताया की ओड़िशा में ओड़िया से हिन्दी अनुवाद की क्रांति पिछले चार दशकों से देखने को मिल रही है जिसका सीधा लाभ ओड़िया साहित्यकारों जैसेः गोपीनाथ महंती तथा डॉ.प्रतिभाराय जैसे अनेक को ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।
अवसर पर स्वरचित हिन्दी कवितापाठ,गीत,संगीत तथा अनेकानेक मनोरंजन के कार्यक्रम प्रस्तुत किये गये। पुरस्कार वितरण समारोह में बच्चों को प्रेमचंद के गोदान उपन्यास आदि भेंट किये गये।यही नहीं,कीट के उत्साही युवा-युवतियों ने नवरस नृत्य,रामप्रसाद बिस्मिल नाटक तथा अनेक मनमोहक रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किये।समारोह में विशेष गणमानय उपस्थिति रही डॉ.काजल परासर,प्रोफेसर हिरण्यमय नंदा,दिप्सिता नायक,पूर्णिमा भोई तथा डॉ श्रुति आदि की।अभिव्यक्ति ख्वाहिशें की ओर से चक्षु दधीचि तथा विधि समेत सभी सदस्यों का योगदान सराहनीय रहा।आभार व्यक्त किया प्रोफेसर भव्याभूषण ने।
अशोक पाण्डेय











