संदेश कोई नहीं देता है। संदेश तो जगत के नाथ, भगवान जगन्नाथ जी किसी न किसी के माध्यम से देते हैं। उनका यह संदेश है कि आप कोई भी काम करने से पहले अच्छी तरह सोचिए और प्रतिदिन अपनी सोच और करनी का स्व मूल्यांकन कीजिए और कुछ भी करने से पहले यह विचार कर लें कि अगर आपके साथ कोई आप जैसी करता है तो आपको कैसा लगेगा। महाबाहु का संदेश है कि निंदा रस के स्वाद से बचें!
-अशोक पाण्डेय
“देवस्नान पूर्णिमा की पूर्व प्रातः कालीन संदेश “










