-अशोक पाण्डेय
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प्रतिदिन श्रीमंदिर में चतुर्धा देवविग्रहों को सुबह में वस्त्र श्रृंगार किया जाता है, उसके उपरांत आभूषण श्रृंगार वेश किया जाता है और रात में पुष्प श्रृंगार वेश में सुशोभित किया जाता है। पुष्प वेश ही बड़ा श्रृंगार वेश है जिस वेश में महाप्रभु के दर्शन के लिए देवलोक से देवगण भी प्रति रात प्रतीक्षारत रहते हैं।
श्रीमंदिर स्वत्व लिपि के अनुसार रात में रत्नवेदी पर चतुर्धा देवविग्रहों के चंदनलागी रीति-रिवाज के उपरांत 10.30 बजे चतुर्धा देवविग्रहों को बड़े श्रृंगार वेश में सुशोभित किया जाता है।
जय जगन्नाथ!
भगवान जगन्नाथ जी का सबसे आकर्षक वेश,बड़ा श्रृंगार वेश:










