


पणजी, गोवा | 25 अप्रैल 2026
भव्यता, आस्था और संस्कृति का अद्वितीय संगम — भगवान परशुराम अवतरण महोत्सव के अंतर्गत राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य आयोजन
पणजी, गोवा में आयोजित “गोमांतक जनक भगवान परशुराम अवतरण महोत्सव” (19 से 25 अप्रैल 2026) ने संपूर्ण वातावरण को भक्ति, श्रद्धा और सांस्कृतिक चेतना से ओत-प्रोत कर दिया। महोत्सव के अंतिम चरण में 25 अप्रैल को प्रातः 9:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक ऑडिटोरियम, माकुइन्स पैलेस (Old GMC, वर्तमान DB Mark), कंपल, पणजी में आयोजित भव्य राष्ट्रीय संगोष्ठी (National Seminar) ने इस आयोजन को एक नई ऊंचाई और विशिष्ट गरिमा प्रदान की।
राष्ट्रीय परशुराम परिषद के तत्वावधान में एवं पणजी नव वर्षा स्वागत समिति के सहयोग से आयोजित इस संगोष्ठी में देशभर से संत, विद्वान, बुद्धिजीवी एवं गणमान्य व्यक्तियों की प्रभावशाली उपस्थिति देखने को मिली। आयोजन स्थल पर आध्यात्मिक ऊर्जा, अनुशासन और उत्साह का अद्भुत वातावरण उपस्थित जनसमूह को गहराई से प्रभावित करता रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक रूप से दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी यतीन्द्रानंद गिरि जी महाराज (जूना अखाड़ा) का सान्निध्य प्राप्त हुआ। दीप प्रज्वलन में मुख्य वक्ता पंडित सुनील भराला (संस्थापक, राष्ट्रीय परशुराम परिषद एवं पूर्व मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार), कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सुनील दत्त शर्मा, परशुराम राष्ट्रीय शक्तिवाहिनी की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. चिदात्मिका संगठन महामंत्री श्री विनय शर्मा एवं राष्ट्रीय महामंत्री श्री मुकेश भार्गव सहित अन्य पदाधिकारियों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सुनील दत्त शर्मा जी ने की, जबकि संचालन राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमती शिवानी सिंह एवं गुजरात के महामंत्री श्री गजेंद्र राजपुरोहित द्वारा किया गया।
सम्बोधन सत्र एवं राज्यों की प्रस्तुति
सम्बोधन सत्र में सर्वप्रथम विभिन्न राज्यों के पदाधिकारियों ने अपने-अपने प्रदेशों की गतिविधियों एवं उपलब्धियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। इस क्रम में दिल्ली प्रदेश के अध्यक्ष रजनीश त्यागी, उत्तर प्रदेश के महामंत्री दीपक जी, राजस्थान से परशुराम शक्ति वाहिनी की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती दक्षिता तथा जम्मू-कश्मीर के प्रदेश अध्यक्ष जीवनानंद शर्मा ने अपने-अपने राज्यों की रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस सत्र में देशभर के प्रतिनिधियों द्वारा संगठन की सक्रियता एवं विस्तार से जुड़े कार्यों का व्यापक विवरण साझा किया गया।
मुख्य वक्ताओं के प्रेरणादायी उद्बोधन
पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी यतीन्द्रानंद गिरि जी महाराज ने अपने संबोधन में बताया कि भगवान परशुराम तीर्थ, अरुणाचल प्रदेश से जुड़ी प्रेरणा के आधार पर इस अभियान की नींव रखी गई। उन्होंने वर्ष 2018 में दिल्ली में आयोजित विशाल आयोजन का उल्लेख करते हुए “राष्ट्रीय परशुराम परिषद” की स्थापना की जानकारी दी और संगठन की निरंतर प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने विश्वास जताया कि यह संगठन न केवल राष्ट्रीय, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
मुख्य अतिथि के रूप में हरियाणा सरकार के कैबिनेट मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा ने भगवान परशुराम जी के जीवन और उनके ऐतिहासिक स्थलों से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने संगठन के प्रति अपना पूर्ण समर्थन व्यक्त करते हुए हरियाणा में भगवान परशुराम जी की 108 फीट ऊँची प्रतिमा एवं भव्य धाम के निर्माण का संकल्प लिया।
परशुराम शक्ति वाहिनी की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ.चिदात्मिका ने नारी सशक्तिकरण पर जोर देते हुए कहा कि समाज में महिलाओं की भागीदारी और सुरक्षा सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने महिलाओं के उत्थान, उत्पीड़न के विरुद्ध जागरूकता, तथा सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ संगठन द्वारा चलाए जाने वाले अभियानों की रूपरेखा प्रस्तुत की।
परशुराम स्वाभिमान सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजय भारद्वाज ने युवाओं को संबोधित करते हुए उन्हें राष्ट्र निर्माण की मुख्य शक्ति बताया और संगठन के माध्यम से सकारात्मक एवं आदर्शवादी नेतृत्व विकसित करने का आह्वान किया।
राष्ट्रीय परशुराम परिषद के संस्थापक पंडित सुनील भराला ने अपने संबोधन में गोवा की ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्ता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भूमि भगवान परशुराम की कर्मभूमि है। उन्होंने सनातन संस्कृति के संरक्षण और पुनर्जागरण के लिए संगठन द्वारा चलाए जा रहे अभियान का विस्तार से वर्णन किया। इस क्रम में भगवान परशुराम जी के पावन प्रतीकों—मूर्ति, चालीसा एवं अंगवस्त्र—को प्रत्येक घर तक पहुँचाने का संकल्प दोहराया गया, जिससे समाज में धर्म, शौर्य और संस्कारों का प्रसार हो सके।
समापन
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों द्वारा सभी अतिथियों, संतों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। यह राष्ट्रीय संगोष्ठी आस्था, विचार और संगठनात्मक शक्ति का अद्वितीय संगम सिद्ध हुई, जिसने समाज में एकता, जागरूकता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का सशक्त संदेश दिया।
“गोमांतक जनक” भगवान परशुराम की इस पावन भूमि से लिया गया संकल्प आने वाले समय में देशभर में सनातन चेतना को और अधिक सशक्त एवं व्यापक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।










