मानव और प्रकृति क्रमशः भगवान पुरुषोत्तम और भगवती राधारानी हैं।-विश्लेषक: अशोक पाण्डेय
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-उपर्युक्त विषय की आज के संदर्भ में वास्तविक प्रासंगिकता को ध्यान में रखकर स्कंद पुराण के उत्कल खण्ड में उड्र प्रदेश के नीलाचल धाम में प्रकृति के उन्मुक्त परिवेश में शबर सम्राट विश्ववसु द्वारा नीलमाधव के रूप में भगवान पुरुषोत्तम की विधिवत पूजा का स्पष्ट वर्णन है जो यह सिद्ध करता है कि श्री जगन्नाथ धाम में स्वयं विष्णु जी ही पुरुष रूप में पुरुषोत्तम हैं तथा प्रकृति का उनका सानिध्य साक्षात भगवती राधारानी हैं।ये दोनों अभिन्न हैं। प्रकृति है तो मनुष्य है।पुरुषोत्तम धाम में भगवान जगन्नाथ जी आनंदमय चेतना के दारु विग्रह/देवविग्रह स्वरुप हैं,चतुर्धा देव विग्रह हैं। वहीं, राधारानी प्रकृति की सुंदरता की प्रतीक हैं। भगवती राधारानी भक्त की असीम चाहत हैं।
इसप्रकार भगवान पुरुषोत्तम और प्रकृति का घनिष्ठ संबंध मानव प्रकृति के आत्मीय और प्रेमपूर्वक साथ साथ रहने का पावन संदेश है। आइए, भगवान पुरुषोत्तम और प्रकृति के अटूट सानिध्य को स्वीकार करते हुए प्रकृति का यथासंभव संरक्षण करते हुए भगवान पुरुषोत्तम की नित्य आराधना करें! भगवती राधारानी की नित्य आराधना करें!
राधे!राधे!!
-अशोक पाण्डेय
मानव और प्रकृति क्रमशः भगवान पुरुषोत्तम और भगवती राधारानी हैं।-विश्लेषक: अशोक पाण्डेय










