श्रीक्षेत्र (पुरी) प्राचीन काल से ही धर्म, साधना, आध्यात्मिक उन्नति, विवाह -संस्कार और जीवन के अंतिम दाह-संस्कार का प्रमुख केंद्र रहा है। अनेक ऋषि,योगी, मुनि, सिद्धपुरुष और अवतारी पुरुष यहाँ आते रहे हैं। यह क्षेत्र साधना,सिद्धि तथा आत्ममुक्ति का पवित्र स्थल माना जाता है। अनादिकाल से भगवान श्रीजगन्नाथ की लीला-भूमि होने के कारण श्रीक्षेत्र धर्मकानन है और अध्यात्म का विशेष केंद्र है।
समस्त मंगल कामनाओं के साथ -अशोक पाण्डेय
श्रीक्षेत्र (पुरी) प्राचीन काल से ही धर्म, साधना, आध्यात्मिक उन्नति, विवाह -संस्कार और जीवन के अंतिम दाह-संस्कार का प्रमुख केंद्र रहा है।











