किसी के सफल जीवन की सफलता में उसके आत्मबल का बहुत महत्त्वपूर्ण स्थान होता है और उसकी विनम्रता ही उसका आत्मबल होता है। श्रीराम ने भी विनम्रता को अपनाया, पवनपुत्र हनुमान ने उसे ही अपना आत्मबल बनाया।
इस सृष्टि में श्रीराम ही भक्त की आत्मा हैं तथा जनकनंदिनी सीता मां ही उसके मन की शांति हैं। आपको शरीर की सुंदरता रूपी लंका की जरूरत नहीं है अपितु श्रीराम रूपी आत्मा की आवश्यकता है।
आज आप चिंतामुक्त रहेंगे!
-अशोक पाण्डेय








