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गोस्वामी तुलसीदास जी के कालजयी महाकाव्य ‘श्रीरामचरितमानस’ के अनुसार:

गोस्वामी तुलसीदास जी के कालजयी महाकाव्य ‘श्रीरामचरितमानस’ के अनुसार: हनुमान जी भगवान श्रीराम के अस्त्र-शस्त्र दोनों थे। वे उनके आदेश पर बाण भी बन जाते थे और उनकी सेवा में पंखा भी झलते थे।
आप भी अपने जीवन में अपने परिवार,समाज और राष्ट्र के लिए अस्त्र-शस्त्र बनें!
आज आपका व्यक्तिगत जीवन आध्यात्मिक कार्यों में लगेगा।
-अशोक पाण्डेय

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