हमारा मनुष्य जीवन भगवान पुरुषोत्तम की अमूल्य संपत्ति है। इस संपत्ति का उपयोग बहुत सोच-समझकर, धीरज और शांतचित्त से अपने चंचल मन, बुद्धि, विवेक को एकाग्र कर तथा सत्यनिष्ठ के साथ पुरुषोत्तम की भक्ति में लगाना चाहिए।नर- सेवा में,गौ सेवा में, ब्राह्मण सेवा में तथा राष्ट्र सेवा में पूरे नि: स्वार्थ भाव से लगाना करना चाहिए क्योंकि यह दुर्लभ मानव शरीर दुबारा नहीं मिलेगा।
-अशोक पाण्डेय
जय हो भगवान पुरुषोत्तम की!











