हमसब का मनुष्य जीवन एक परीक्षा स्थल है। इस परीक्षा में हमसब प्रतिपल परीक्षा देते हैं और पास फेल होते हैं।जब पास होते हैं तब मनुष्य जीवन की सार्थकता सत्य सिद्ध होती है। जब फेल होते हैं तब हमारे मनुष्य जीवन की नाकामी दिखाई देती है। ऐसे में,ऐसा क्यों न सोचें और करें कि हमारे व्यक्तिगत जीवन की सार्थकता सत्य सिद्ध हो सके? हमारी सहायता भगवान पुरुषोत्तम करेंगे।
-अशोक पाण्डेय
भगवान पुरुषोत्तम की जय हो!











