भुवनेश्वरः12 जूनःअशोक पाण्डेयः
स्थानीय कीट डीम्ड विश्वविद्यालय में दिनांकः09 जून से 12 जून तक चार दिवसीय एक हिन्दी कार्यक्रम आयोजित किया गया।वह कार्यक्रम 12 जून को अनेकानेक उपलब्धियों के साथ अपराह्न काल में संपन्न हो गया। आयोजन की खास बात यह रही कि हिन्दी संसाधक द्य के रुप में ओड़िशा केन्द्रीय विश्वविद्यालय,कोरापुट के भूतपूर्व कुलपति प्रोफेसर चक्रधर त्रिपाठी तथा स्थानीय केन्द्रीय विद्यालय नं-6,पोखरीपुट के अवकाशप्राप्त प्राचार्य अशोक पाण्डेय ने योगदान दिया।हिन्दी कार्यक्रम के अंतिम दिवस के कार्यक्रम का आरंभ संसाधक द्य द्वारा भगवान जगन्नाथ और हनुमान जी की तस्वीर के समीप परम्परागत दीपप्रज्ज्वलन के साथ हुआ।अपने संबोधन में प्रोफेसर चक्रधर त्रिपाठी ने बताया कि भारतीय संघ की राजभाषा हिन्दी की सबसे बड़ी विशेषता इसकी शब्द-सम्पदा है जिसमें तत्सम,तद्भव,देशज तथा विदेशी शब्द है। यह राजभाषा बोल-चाल की सबसे सशक्त और उपयोगी राजभाषा है।यह हिन्दी प्रेम की भाषा है। हिन्दी में जैसा बोला जाता है वैसा ही लिखा भी जाता है। हिन्दी की सम्प्रेषणियता सरल है।उन्होंने यह भी बताया कि वे अच्छी तरह से जानते हैं कि किसी भी अहिन्दी भाषी प्रदेश के डीम्ड विश्वविद्यालय में हिन्दी कार्यशाला कभी भी आयोजित नहीं होती है लेकिन संसाधक अशोक पाण्डेय ने बताया कि पिछले लगभग 20 सालों से वे यहां पर यहां के तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के लिए प्रतिवर्ष हिन्दी कार्यशाला आयोजित करते रहे हैं जो एक सुखद पहल है,खुशी की बात है क्योंकि कीट डीम्ड विश्वविद्यालय भारत का छठा सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय है जहां पर हिन्दी भाषी युवा-युवती तकनीकी और उच्च शिक्षा अर्जित करते हैं जिनमें अधिकतक हिन्दी भाषी प्रदेशों से हैं और उनके साथ उनके छात्रावासों में यहां के कर्मचारियों को सरल और व्यावहारिक हिन्दी बोलना बहुत जरुरी है। वहीं संसाधक अशोक पाण्डेय ने बताया कि कीट-कीस और कीम्स में लगभग 80 हजार युवा-युवती पढ़ते हैं जिनके लिए ओड़िशा के कार्यरत ओड़िया महिला और पुरुष कर्मचारियों को इस हिन्दी कार्यक्रम के माध्यम से दक्ष बनाया बहुत जरुरी है।उनको बोलचाल के लिए हिन्दी सिखाना बहुत जरुरी है। गौरतलब है कि कीट डीम्ड विश्वविद्यालय का मानव संसाधन विभाग और विभाग के महानिदेशक डॉ. शिवानंद मिश्र के कुशल मार्गदर्शन में यह हिन्दी प्रशिक्षण कार्यक्रम पिछले 20 वर्षों से चल रहा है।अशोक पाण्डेय ने यह भी बताया कि कीट-कीस और कीम्स के संस्थापक प्रोफेसर अच्युत सामंत जी कभी भी हिन्दी नहीं पढ़े लेकिन वे जब राज्यसभा और कंधमाल लोकसभा के सांसद रहे तो संसद में प्रशनकाल के प्रश्नकाल के दौरान सभी प्रश्न वे हिन्दी में ही पूछते नजर आये।आज भी प्रोफेसर सामंत सभी भाषाओं का आदर करते हैं तथा अपनी मातृभाषा ओड़िया के अधिक से अधिक प्रयोग के लिए सतत प्रयत्नशील रहते हैं। आयोजित चार दिवसीय कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण प्रतिभागियों द्वारा आपस में हिन्दी में विचार-विमर्श का कार्यक्रम रहा।सहायक निदेशिका,कीटमानवसंसाधन विभाग डॉ.मनोज्ञा पण्डा द्वारा तैयार चार दिवसीय हिन्दी कार्यक्रम की रुपरेखा पूरी तरह से व्यावहारिक सिद्ध हुई जिसके चलते समस्त प्रतिभागियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और कार्यक्रम को सफल बनाया।
अशोक पाण्डेय











