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पाशुपतास्र क्या है?
अनुचिंतन: अशोक पाण्डेय
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पर्वतराज हिमालय पर भगवान भोलेनाथ की कठोर तपस्या करके धनुषधारी अर्जुन ने भगवान भोलेनाथ से पाशुपतास्र प्राप्त किया था। भगवान भोलेनाथ ने एक शिकारी के रूप में अर्जुन की धनुष विद्या की दक्षता की स्वयं प्रायोगिक परीक्षा लेकर पाशुपतास्र प्रदान किया था। प्रत्यक्षदर्शी रहे थे स्वयं शांतिदूत नारायण और देवराज इन्द्र। भगवान भोलेनाथ ने अर्जुन से पाशुपतास्र के प्रयोग के लिए अर्जुन को धर्म की रक्षा के लिए आदेश दिया। यही नहीं,पाशुपतास्र प्रदान करते ही भगवान पशुपतिनाथ ने अर्जुन के पूरे शरीर को अपनी दिव्य पाशुपतास्र की शक्ति के तेज से कवच की तरह सुरक्षित बना दिया।
मान्यवर, आप अगर अपने हिन्दू जीवन को सार्थक बनाना चाहते हैं तो धर्म की राह पर चलें और सत्कर्म करें!
-अशोक पाण्डेय
जय भोलेनाथ! जय पशुपति नाथ!!










