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जय जगन्नाथ! जय हनुमान!!

जय जगन्नाथ!
जय हनुमान!!
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मान्यवर,आप अनंत सद्गुणों के भण्डार बनें!
आप अपने मन में न तो किसी की निंदा का भाव रखें न ही किसी प्रकार का स्वार्थ रखें!
आप हमेशा मुस्कराते रहें और जरूरतमंद लोगों के चेहरे पर स्थाई मुस्कान देते रहें!
-अशोक पाण्डेय

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